
बिहार सरकार जमीन अधिग्रहण का देगी 4 गुना पैसा (फोटो-सांकेतिक)
Bihar land acquisition policy 2026: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 27 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इस बैठक के दौरान राज्य की भूमि अधिग्रहण नीति के संबंध में एक बड़ा फैसला भी लिया गया। कैबिनेट ने 'बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026' के गठन के लिए हरी झंडी दे दी है।
इस नई नीति के तहत जनहित के प्रोजेक्ट जैसे सड़क, अस्पताल और पुल आदि के निर्माण के लिए जरूरी जमीन अब रैयतों (जमीन मालिकों) से उनकी मर्जी से खरीदी जाएगी। नए नियमों के अनुसार, जो जमीन मालिक अपनी जमीन सरकार को अपनी मर्जी से देंगे, उन्हें मौजूदा बाजर दर से चार गुना तक मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा, ऐसे लेन-देन पर कोई रजिस्ट्री या स्टांप शुल्क भी रैयत को नहीं देना होगा।
बिहार में अक्सर देखा जाता है कि बड़े विकास प्रोजेक्ट भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे को लेकर होने वाले विवादों की वजह से सालों तक अटके रहते हैं। इस लंबी और पेचीदा भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को आसान बनाने और खत्म करने के लिए, सरकार ने रैयतों से सीधे जमीन खरीदने की एक नीति बनाई है। जिसके तहत दिए जाने वाले मुआवजे की दर काफी आकर्षक रखी गई है।
नई नीति के तहत ग्रामीण इलाकों में सरकारी प्रोजेक्टों के लिए ली गई निजी जमीन के लिए मिलने वाला मुआवजा बाजार मूल्य या सर्किल रेट (जो भी ज्यादा हो) उससे चार गुना की दर से दिया जाएगा। इसके विपरीत, शहरी इलाकों में स्थित जमीन के लिए जमीन मालिक को बाजार मूल्य या सर्किल रेट से दो गुना अधिक मुआवजा मिलेगा।
मुआवजे की रकम के अलावा, जो रैयत अपनी जमीन अपनी मर्जी से देने के लिए राजी होंगे, उन्हें 10 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। इस नीति के तहत सरकार द्वारा खरीदी गई जमीन के रजिस्ट्रेशन पर लगने वाला स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह से माफ कर दी जाएगी। दूसरे शब्दों में कहें तो जमीन मालिक को टैक्स के रूप में एक भी रुपया देने की जरूरत नहीं होगी।
Updated on:
27 May 2026 06:49 pm
Published on:
27 May 2026 06:49 pm
