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बिहार में अब बिना जांच नहीं होगी जमीन रजिस्ट्री, लागू होगा वेटिंग पीरियड; बदल जाएंगे नियम

Bihar land registry new rules: क्या आप बिहार में जमीन खरीदने की सोच रहे हैं? तो जान लीजिए कि अब नियम बदलने जा रहा है। बिहार सरकार अब रजिस्ट्री से पहले जमीन की गहन जांच कराएगी। खरीदारों को अब पोर्टल पर 13 तरह की जानकारी देनी होगी, जिसकी जांच अंचल अधिकारी 10 दिनों के भीतर करेंगे। 

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पटना

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Anand Shekhar

May 10, 2026

bihar land registry

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Bihar land registry new rules: बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े फर्जीवाड़े को खत्म करने के लिए सम्राट सरकार रजिस्ट्री के नियमों में बदलाव करने जा रही है। राजस्व और निबंधन विभाग ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक नया फॉर्मूला तैयार किया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब जमीन खरीदने वालों को निबंधन से पहले 10 दिनों का वेटिंग पीरियड बिताना होगा।

रजिस्ट्रेशन से पहले देनी होगी 13 जानकारी

एक बार जब यह नई व्यवस्था लागू हो जाएगी तो अब सीधे रजिस्ट्रेशन ऑफिस जाकर जमीन का रजिस्ट्रेशन करवाना मुमकिन नहीं होगा। खरीदार और विक्रेता को सबसे पहले ई-निबंधन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इस आवेदन के दौरान जमीन से जुड़ी 13 प्रकार की अनिवार्य जानकारियां देनी होंगी। इसमें जमीन का खाता, खेसरा (प्लॉट संख्या), रकबा (क्षेत्रफल/माप), चौहद्दी (सीमाएं) और सबसे सबसे महत्वपूर्ण वर्तमान जमाबंदी की स्थिति शामिल होगी। इसके अलावा बेचने वाले को यह प्रमाणित करना होगा कि जमीन किसी भी पिछले विवाद या बैंक के बकाया कर्ज से मुक्त है।

CO की रिपोर्ट के बाद ही होगा रजिस्ट्रेशन

जैसे ही पोर्टल पर कोई आवेदन जमा किया जाएगा संबंधित अंचल अधिकारी के पास एक सूचना पहुंच जाएगी। सरकार ने इन अंचल अधिकारियों के लिए जांच पूरी करने के लिए 10 दिनों की समय-सीमा तय की है। इस वेटिंग पीरियड के दौरान CO जमीन के दस्तावेजों की पूरी तरह से जांच करेंगे। वे इस बात की पुष्टि करेंगे कि क्या बेचने वाला सचमुच उस जमीन का असली मालिक है।

अंचल अधिकारी यह भी सुनिश्चित करेंगे कि जमीन सरकारी, प्रतिबंधित या किसी अदालती विवाद में तो नहीं फंसी है। दी गई चौहद्दी और रकबा सरकारी रिकॉर्ड से मेल खाते हैं या नहीं। सीओ की सर्टिफाइड रिपोर्ट मिलने के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और खरीदार को निबंधन के लिए स्लॉट दिया जाएगा।

धोखाधड़ी रोकने के लिए बदली जा रही प्रक्रिया

बिहार में जमीन से जुड़े विवादों का मुख्य कारण खरीदार को जमीन के इतिहास और उस पर चल रहे किसी भी विवाद के बारे में जानकारी न होना रहा है। खरीदार अक्सर अनजाने में ऐसी विवादित जमीन या प्लॉट खरीद लेते थे, जिन पर पहले से ही कर्ज चढ़ा होता था। यह नई व्यवस्था खरीदारों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेगी। अब असली रजिस्ट्रेशन से पहले सरकारी तंत्र साफ तौर पर यह जांच करेगा कि जमीन का मालिकाना हक किसका है। इस पहल से न केवल आम नागरिक की मेहनत की कमाई सुरक्षित रहेगी, बल्कि राज्य में जमीन विवादों के कारण होने वाली हिंसक घटनाओं में भी कमी आएगी।

अधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा, जल्द होगी शुरुआत

राजस्व और निबंधन विभाग ने इस नई व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है। राज्य भर के सभी सर्किल अधिकारियों ने इस नई व्यवस्था और इससे जुड़े सॉफ्टवेयर को चलाने का प्रशिक्षण पहले ही पूरा कर लिया है। विभाग ने किसी भी तकनीकी खराबी को दूर करने और उनका समाधान करने के लिए मोबाइल यूनिट भी तैनात की हैं। उम्मीद है कि सरकार इस सप्ताह के अंत तक या इस महीने के आखिरी दिनों में इस व्यवस्था को पूरे राज्य में औपचारिक रूप से लागू कर देगी।

क्या है इस बदलाव का उद्देश्य?

सरकार का मानना है कि सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के संकल्प को पूरा करने के लिए जमीन के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी करना जरूरी है। हालांकि, 10 दिनों की प्रतीक्षा अवधि के कारण यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी लग सकती है, लेकिन यह खरीदारों को भविष्य में होने वाले सालों लंबे कानूनी मुकदमों और उससे होने वाली मानसिक परेशानी से प्रभावी रूप से बचाएगी। उम्मीद है कि यह कदम बिहार में सक्रिय भूमि माफिया के गिरोहों पर भी करारा प्रहार करेगा।