27 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

विदेश से बिहार में हो रहा था करोड़ों का फ्रॉड, इंटरपोल की मदद से दबोचे जाएंगे अपराधी; CBI ने लॉन्च किया ऑपरेशन

Bihar foreign fugitives: बिहार में संगीन अपराध कर विदेश भागने वाले अपराधियों के खिलाफ CBI की IPCU और बिहार पुलिस ने एक ऑपरेशन लॉन्च किया है। इसके तहत हत्या, सायबर फ्रॉड और ड्रग तस्करी के आरोपियों को इंटरपोल की मदद से वापस भारत लाया जाएगा।

2 min read
Google source verification

पटना

image

Anand Shekhar

May 27, 2026

सीबीआई (IANS)

Bihar foreign fugitives: विदेश में बैठकर बिहार में अपना क्राइम सिंडीकेट चलाने वाले अपराधियों को वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी कार्रवाई शुरू होने वाली है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की इंटरनेशनल पुलिस कोऑपरेशन यूनिट (IPCU) ने बिहार पुलिस के साथ मिलकर एक विशेष अभियान शुरू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य हत्या, सायबर फ्रॉड, ड्रग तस्करी, मानव तस्करी और बड़े आर्थिक अपराधों को अंजाम देकर विदेश में छिपे अपराधियों को ट्रेस करना और उन्हें भारत वापस लाना है।

इस फैसले के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने आपराधिक जांच विभाग (CID) के जरिए राज्य भर के सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को अलर्ट जारी किया है। सभी जिलों से उन अपराधियों के बारे में जानकारी मांगी गई है, जिनके खिलाफ मामले दर्ज होने के बाद वे देश छोड़कर भाग गए थे।

अपराधियों की खंगाली आ रही कुंडली

पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए जिला पुलिस इकाइयों को अपने-अपने क्षेत्र के फरार अपराधियों का एक रिकॉर्ड तैयार करने का निर्देश दिया गया है। यह रिकॉर्ड सिर्फ नामों और पतों तक ही सीमित नहीं होगा। इसमें पूरी जानकारी शामिल होगी जैसे कि अपराधी का नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, वर्तमान पता, फोटो, दर्ज मामलों की डिटेल और प्रथम सूचना रिपोर्ट की कॉपी। इसमें अपराधी का पासपोर्ट नंबर और उसकी वर्तमान स्थिति (सक्रिय या निलंबित) भी बताई जाएगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराधियों की पहचान पुख्ता बनाने के लिए उनके फिंगरप्रिंट्स और अन्य बायोमेट्रिक जानकारी भी जुटाई जा रही है।

4 कैटेगरी में बांटे गए अपराधी

CBI की IPCU ने इन भगोड़े अपराधियों को चार कैटेगरी में बांटा है। जिसके तहत, पहली कैटेगरी में आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े व्यक्ति शामिल हैं, जबकि दूसरी कैटेगरी में नशीले पदार्थों और ड्रग्स की तस्करी में शामिल बड़े नेटवर्क शामिल हैं। वहीं, तीसरी कैटेगरी में गंभीर आर्थिक अपराधों जैसे बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी व्यक्ति शामिल हैं, जबकि चौथी कैटेगरी में साइबर अपराध और मानव तस्करी के आरोपी शामिल हैं। इन चारों कैटेगरी के अपराधियों के लिए एक सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रोफाइलिंग और पहचान करना आसान हो सके।

इंटरपोल और विदेशी एजेंसियां करेंगी मदद

तैयार हो रहे इस डिजिटल डेटाबेस को भारत सरकार इंटरपोल और दूसरे देशों की एजेंसियों के साथ साझा करेगी। जैसे ही किसी देश में बिहार के किसी अपराधी का ठिकाना पक्का हो जाएगा, भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के अनुसार, उस अपराधी के प्रत्यर्पण या डिपोर्टेशन की कानूनी प्रक्रिया तुरंत शुरू कर देगी। जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि इस पहल से उन गिरोहों की कमर टूट जाएगी जो विदेश में रहते हुए भी बिहार में अपराध सिंडिकेट चलाते हैं।

विदेश से जुड़े हैं बिहार के सायबर फ्रॉड के तार

हाल के वर्षों में बिहार के कई जिलों में साइबर फ्रॉड के अनेक मामले सामने आए हैं, जिनके सीधे तार विदेश से जुड़े हैं। पटना, भागलपुर और सीवान जैसे जिलों में की गई जांचों से पता चला है कि कई शातिर साइबर अपराधी खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों से दूर बैठकर ही धोखाधड़ी का जाल बुन रहे हैं।

भागलपुर में सामने आए एक हाई-प्रोफाइल साइबर धोखाधड़ी के मामले में एक बैंक मैनेजर और एक बुजुर्ग नागरिक से 2.31 करोड़ रुपये की ठगी की गई। बाद में हुई जांच से पता चला कि इस धोखाधड़ी को अंजाम देने वाला अपराधी नेटवर्क भारत के बाहर से काम कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि एडवांस और डिजिटल टेक्नोलॉजी की वजह से अब आपराधिक गतिविधियां इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर चुकी हैं।