नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की, वो मीठे रस से भी राधा-रानी लागे, गोविन्दा आला रे आला, जरा मटकी संभाल ब्रजवाला जैसे भक्ति गीतों और जय श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ गुरूवार को सरस्वती शिशु मंदर भैरोगंज में पूरा परिसर कृष्णमय हो गया।
हमारी संस्कृति सनातन है। हमारे संस्कार विश्व बंधुत्व की भावना से युक्त हैं। श्रीकृष्ण का जीवन साहस, शौर्य, वीरता, उल्लास एवं प्रेम से भरा है। भगवान श्रीकृष्ण लोकनायक, राष्ट्रनायक, कर्मयोगी एवं गीता के उपदेशक रहे हैं। उन्होनें संस्कृति समाज एवं राष्ट्र के उत्थान हेतु अन्याय और अत्याचार के खिलाफ शंखनाद करके तब तक नहीं रुके जब तक कि असुरी शक्तियों को समूल नष्ट नहीं कर दिया। देश और समाज को आंतकित और भयभीत करने वाले बड़े-बड़े राक्षसों का वध कर धर्म की पुन: संस्थापना करके भारतीय संस्कृति का संरक्षण, संवद्र्धन एवं उत्थान का कार्य किया।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में बालगोकुलम कार्यक्रम में सरस्वती शिशु मंदिर भैरोगंज में श्रीकृष्ण की जीवन्त झांकियों कार्यक्रमों में उनके जीवन दर्शन के साक्षात दर्शन होते हैं। सारा वातावरण भक्तिमय तथा बाल लीलाओं से ओतप्रोत हो गया। जब सारा विद्यालय प्रांगण श्रीकृष्णमय हुआ तो मानो गोकुल, मथुरा, वृंदावन का अवतरण हुआ। झांकियों के रुप में भगवान श्रीकृष्ण के साक्षात दर्शनहो गए।