आदेश – अब शिक्षक कराएंगे सिर्फ पढ़ाई

बिना अनुमति गैर शिक्षकीय कार्य में न लगाने के आदेश

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Sep 17, 2016
teacher

सिवनी.
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा कई और काम थमा दिए जाते हैं, जिनको पूरा करने में शिक्षकों का काफी समय गुजर जाता है, ऐसे में बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। यह स्थिति बार-बार बनती रही है, जिसको जिला व प्रदेश स्तर के अफसर भी निरीक्षण के दौरान महसूस करते रहे हैं। तो वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने भी शिक्षकों को गैर शिक्षकीय कार्य में न लगाए जाने के सम्बंध में स्पष्ट आदेश दिए हैं। जिसके तहत अब इस स्थिति से निपटने और शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए लोक शिक्षण मप्र द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

मप्र लोक शिक्षण आयुक्त नीरज दुबे द्वारा कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक को निर्देशित कर कहा गया है कि संचालनालय के अधिकारियों के प्रवास में यह देखने में आ रहा है कि विभिन्न प्रकार के कार्यों में शिक्षकों को अपनी शाला से अन्य स्थानों पर ऐसे कार्यों पर लगा दिया जाता है, जो कार्य लिपिकीय पृवृत्ति का होता है। जो कि शिक्षकों को उनकी शाला से अन्यत्र भेजे जाने से शाला के नियमित शैक्षणिक कार्यों को प्रभावित करता है।

आयुक्त ने पत्र के माध्यम से बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शिक्षकों को गैर-शिक्षकीय कार्य में न लगाए जाने के सम्बंध में भारत निर्वाचन आयोग विरुद्ध सेंट मेरी स्कूल एवं अन्य प्रकरण में 6 दिसम्बर 2007 को इस सम्बंध में विस्तृत आदेश दिए गए हैं। सामान्यत: निर्वाचन एवं जनगणना तथा परीक्षा से सम्बंधित कार्यों को छोड़कर किसी भी अन्य कार्य में शिक्षकों को नहीं लगाना चाहिए। यदि शैक्षकीय प्रयोजन से ऐसी आवश्यकता पड़ती है, तो भी उन्हें इस कार्य के लिए किसी भी हालत में दूसरी शालाओं में तो नियोजित नहीं ही करना चाहिए। इसलिए आयुक्त द्वारा सख्त निर्देश देते कहा गया है कि भविष्य में सामान्यत: निर्वाचन एवं जनगणना तथा परीक्षा से सम्बंधित कार्यों को छोड़कर शिक्षकीय अमले को अपनी मूल शाला से अतिरिक्त कहीं अन्य नियोजित नहीं किया जाए। आयुक्त द्वारा इस आदेश का कड़ाई से पालन किए जाने के निर्देश दिए गए हंै।
Published on:
17 Sept 2016 11:29 am
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