नगर के छोटी पुलिस लाइन और बड़ी पुलिस लाइन में वर्षो पहले बने आवास अब जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं। इसके बाद भी इनमें कर्मचारी निवास कर रहे हैं। कई वर्ष पूर्व इन आवासों को बनाया गया था लेकिन जिम्मेदारों द्वारा समय-समय पर मरम्मत नहीं करवाई गई।
इस कारण ये आवास अब जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। इनमें से कई आवासों में अभी भी कर्मचारी रह रहे हैं। इसके अलावा कुछ आवास खाली पड़े हैं। इनमें से से आवासों की स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है। जिनका रिपेरिंग का काम नहीं कराया गया है। समय रहते इन आवासें की मरम्मत करा ली जाती तो ये आवास जर्जर नहीं होती।
पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन द्वारा लाइन कालोनी में वर्षो पहले आवासों को बनाकर तैयार कर दिया है। जिसमें कई आवासों को आवंटित नहीं किया गया है।
पुलिस कर्मियों के सामने संकट
बताया जा रहा है कि पुलिस प्रशासन द्वारा पुराने मकानों में रहने को मजबूर है। जिसे अभी तक खाली नहीं कराया गया है। रहने वाले परिवारों ने बताया कि नए भवन का आवंटन नहीं मिलने के कारण इस जर्जर इमारतों में रहने को मजबूर है। जो कि हादसे का कारण बन सकता है।
तत्कालीन कलेक्टर भरत यादव ने छोटी पुलिस लाइन की जगह पर बुधवारी, शुक्रवारी बाजार के लिए पार्किंग बनाने का प्रस्ताव किया था लेकिन उनके तबादले के बाद इस प्रस्ताव पर कोई प्रगति नहीं हुई।
पुलिस लाइन के इन मकानों को डिसमेंटल कर नए आवास बनाने का प्रस्ताव है। आरआई सुनील नागवंशी ने बताया है कि छोटी और बड़ी दोनों पुलिस लाइन में नए आवासों के निर्माण के संबंध में प्रक्रिया जारी है। शीघ्र ही इन दोनों जगहों पर नए आवासों का निर्माण करा लिया जाएगा।