
सिवनी. प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जुलाई के प्रथम सप्ताह में जिले के दौरे से आमजन, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों को कई महत्वपूर्ण मांगों के पूरा होने की उम्मीद थी। हालांकि दौरा समाप्त होने के बाद जिले से जुड़ी कई प्रमुख मांगों पर कोई घोषणा या स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला। जिससे लोगों में मायूसी है। लंबे समय से सिवनी जिले के 167 वर्ष पुरानी तहसील लखनादौन को जिला बनाने की मांग हो रही है। कई बार प्रदर्शन भी हो चुका है, लेकिन नतीजा सिफर रहा है। इस बार उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री बड़ी घोषणा करेंगे। दरअसल जिला मुख्यालय से यह तहसील काफी दूर पड़ती है। ऐसे में यहां के लोग जिला बनाने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। इसके अलावा सिवनी जिले को संभाग का मुख्यालय बनाए जाने एवं सिवनी नगरपालिका को नगर निगम बनाए जाने को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कोई जिक्र नहीं किया। हालांकि सिवनी विधानसभा के विधायक दिनेश राय मुनमुन ने भले ही मंच से संभाग को लेकर जिक्र किया। लंबे समय से लालमाटी क्षेत्र के किसान सिंचाई परियोजना की मांग कर रहे हैं। माइक्रो लिफ्ट इरीगेशन सिंचाई परियोजना से ही यहां के किसानों का भला हो सकता है। सिवनी में मेडिकल कॉलेज खुल जाने के बाद सेकंड फेज का काम अब तक शुरु नहीं हो पाया है। पिछली बार मुख्यमंत्री ने घोषणा तो की थी, लेकिन अब तक इसे क्रियान्वित नहीं किया गया। जिले में लंबे समय से अधोसंरचना विकास, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, शिक्षा, सिंचाई परियोजनाओं, रोजगार सृजन और अन्य विकास कार्यों से संबंधित मांगें लंबित हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना था कि मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान इन मुद्दों पर बड़ी घोषणा हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
दौरे के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि सरकार जिले की लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और आगामी समय में आवश्यक निर्णय लेकर विकास कार्यों को गति देगी।
संगठनों ने ज्ञापन सौंपकर रखी मांग
कांग्रेस सहित कई संगठनों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर जिले से संबंधित विभिन्न मांगों को रखा है। हालांकि अब देखना यह होगा कि भविष्य में इन ज्ञापन का कितना असर होता है। इसमें जिले को संभाग का मुख्यालय बनाया, सिवनी नगरपालिका को नगर निगम बनाना, सिवनी मेडिकल कॉलेज में अस्पताल निर्माण का कार्य शीघ्र प्रारंभ करना, इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय में आवश्यक चिकित्सा जांच उपकरण उपलब्ध कराए जाने के साथ चिकित्सा विशेषज्ञो की नियुक्ति, खैरी से नगझर तक निर्माणाधीन गुणवत्ताहीन सडक़ की जांच कराकर दोषियो पर शीघ्र कार्यवाही, सिवनी थोक कृषि उपजमंडी में आवश्यक सडक़, शौचालय, व्यवस्थित पार्किंग का निर्माण, छिंदवाड़ा एवं बरघाट रोड रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज का निर्माण, धनौरा तहसील में कॉलेज सहित अन्य मांग की गई है।
मक्का फसल को लेकर भी नहीं की कोई घोषणा
जिले में खरीफ के सीजन में सबसे अधिक मक्का की फसल लगाई जाती है। हालांकि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में उत्पादक किसानों की समस्याओं, उनकी उपज के सही दाम या मक्का प्रोसेसिंग यूनिट लगाने जैसी किसी भी योजना पर कोई जिक्र नहीं किया गया। ऐसे में मक्का उत्पादक किसान मायूस हैं।