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College: महाविद्यालय व्यक्तित्व निर्माण, ज्ञानार्जन के विकास का केंद्र

विद्यार्थियों को इन संसाधनों का नियमित उपयोग कर अपने अध्ययन, शोध एवं ज्ञान-विस्तार को समृद्ध करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो. पंकज गहरवार ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को अपने जीवन का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया।
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सिवनी

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Ashish Kumar Mishra

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Updated: 31 Jul 2026, 11:31 AM IST

college admission

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शासकीय कॉलेज में तीन दिवसीय दीक्षारंभ कार्यक्रम का शुभारंभ


सिवनी. शासकीय महाविद्यालय बरघाट में सत्र 2026-27 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए तीन दिवसीय दीक्षारंभ कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. बीएल इनवाती के अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े स्वयंसेवकों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। तत्पश्चात समस्त स्टॉफ और नवप्रवेशित विद्यार्थियों और उनके पालकों का तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य ने कहा कि दीक्षारंभ कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, छात्र कल्याण योजनाओं एवं उपलब्ध संसाधनों से परिचित कराना है, ताकि वे अपने शैक्षणिक जीवन की सशक्त शुरुआत कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, अनुशासन, नैतिक मूल्यों तथा सह-शैक्षणिक एवं व्यक्तित्व विकास संबंधी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता का आव्हान करते हुए कहा कि महाविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, ज्ञानार्जन एवं जीवन मूल्यों के विकास का केंद्र है। कार्यक्रम के प्रथम दिवस में विद्यार्थियों को महाविद्यालय का परिचय, विभिन्न संकायों, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, ई-लाइब्रेरी, राष्ट्रीय सेवा योजना सांस्कृतिक गतिविधियों तथा छात्र कल्याण एवं छात्रवृत्ति योजनाओं सहित अन्य योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, एंटी-रैगिंग, साइबर सुरक्षा एवं छात्र आचार संहिता से भी अवगत कराया गया। डॉ. प्रदीप त्रिवेदी ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय के पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं एवं ई-लाइब्रेरी की सुविधाओं की जानकारी देते हुए कहा कि पुस्तकालय किसी भी शिक्षण संस्थान का ज्ञान केंद्र होता है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ही सफलता की पहली सीढ़ी है। यदि विद्यार्थी अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ें, तो सफलता निश्चित रूप से उनके कदम चूमेगी। उन्होंने विद्यार्थियों से महाविद्यालय की शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता करने का आव्हान करते हुए कहा कि यही उनके व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। तीन दिवसीय दीक्षारंभ कार्यक्रम के अंतर्गत आगामी दो दिनों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन, करियर मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास, छात्र कल्याण योजनाओं तथा अन्य समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान एवं संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों मोनिका शरणागत, शुभम, लोकेश हुमनेकर, सोमायला खान इत्यादि का योगदान रहा।

वन अधिकार दावों के पुन: परीक्षण के लिए अभियान शुरु
सिवनी. वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लंबित, निरस्त एवं नवीन प्राप्त व्यक्तिगत तथा सामुदायिक वन अधिकार दावों के पुन: परीक्षण एवं निराकरण के लिए जिले में 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के प्रभावी संचालन के लिए कलेक्टर नेहा मीना ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अभियान के दौरान व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार दावों का नियमानुसार शत-प्रतिशत परीक्षण एवं निराकरण किया जाएगा। साथ ही अभियान अवधि में प्राप्त होने वाले नए दावों को भी स्वीकार कर उनका परीक्षण किया जाएगा। व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार दावों का निराकरण एमपीएफआरए पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जबकि सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन से संबंधित दावों का निराकरण ऑफलाइन प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। अभियान के तहत ग्राम वन अधिकार समितियों द्वारा 1 से 9 जुलाई तक दावों का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद 10 से 25 जुलाई तक स्थल निरीक्षण कर नक्शे तैयार किए जाएंगे तथा उन्हें पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। 26 जुलाई से 6 अगस्त तक ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित कर दावे उपखंड स्तरीय समिति को भेजे जाएंगे। 6 अगस्त से 6 सितंबर तक उपखंड स्तरीय समितियों द्वारा दावों का परीक्षण कर अनुशंसा सहित प्रकरण जिला स्तरीय समिति को भेजे जाएंगे। इसके पश्चात 7 सितंबर से 7 अक्टूबर तक जिला स्तरीय समिति द्वारा दावों का अंतिम परीक्षण एवं निराकरण किया जाएगा। स्वीकृत दावों के वन अधिकार पत्र तैयार कर पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे तथा अपात्र पाए गए मामलों में नियमानुसार कारण सहित सूचना जारी की जाएगी। अंत में 8 से 31 अक्टूबर तक जारी वन अधिकार पत्रों का वन एवं राजस्व अभिलेखों में दर्जीकरण कर हितग्राहियों को अभिलेख उपलब्ध कराए जाएंगे। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक ग्राम में विशेष शिविर आयोजित कर व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ पात्र हितग्राहियों की अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की जाए, ताकि अभियान के दौरान सभी पात्र दावों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित हो सके।