हवाओं की वजह से आग फैलती ही चली गई। छपारा कला और छपारा खुर्द में खेतों से होते हुए सादक सिवनी तक आग की लपटें पहुंच गई।
सिवनी. जिले में नरवाई जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शनिवार सुबह छपारा के खैरी टोला के पास एक खेत में नरवाई में लगी आग ने देखते ही देखते भीषण रूप ले लिया और लगभग 4 किमी तक फैल गई। हवाओं की वजह से आग फैलती ही चली गई। छपारा कला और छपारा खुर्द में खेतों से होते हुए सादक सिवनी तक आग की लपटें पहुंच गई। जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस एवं छपारा नगर परिषद को दी। वहीं सिवनी से भी दमकल वाहन बुलाए गए। ग्रामीणों ने दमकल वाहन की मदद से घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गनीमत रही कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस आगजनी ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया। इतना ही नहीं कई हरे भरे पेड़ों को भी आग ने अपने चपेट में ले लिया। वहीं टमाटर की खेती के लिए लगाए गए खेत में उपकरण भी जलकर खाक हो गए। भीषण आग लगने की वजह से देर शाम तक क्षेत्र में हर तरफ धूंआ ही दिखाई दे रहा था। सुबह लगभग 10 बजे लगी आग पर दोपहर दो बजे के बाद काबू पाया गया। वहीं कृषि विभाग द्वारा अब तक जिले में नरवाई जलाने का महज एक एफआईआर दर्ज कराया गया है। जबकि घटनाएं 50 से ऊपर हो चुकी हैं। विभाग का कहना है कि रिपोर्ट मिल गई है। जल्द ही मामला दर्ज कराया जाएगा। उल्लेखनीय है जिले में जिला प्रशासन ने मार्च माह में फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई (पराली) जलाने की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए इस पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया था।
आदेश और जागरुकता भी नहीं आ रही काम
कलेक्टर द्वारा जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिससे आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही अनियंत्रित आग से जन-धन की हानि, भूमि की उर्वरता में कमी तथा पर्यावरण एवं जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जिले की राजस्व सीमा में किसी भी किसान या व्यक्ति द्वारा नरवाई जलाना पूर्णत: प्रतिबंधित किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक विधिक प्रावधानों के तहत भी सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सतत निगरानी के भी दिए हैं निर्देश
कलेक्टर ने जिले के सभी एसडीएम, तहसीलदार एवं राजस्व अमले को अपने-अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कृषि एवं राजस्व विभाग को संयुक्त रूप से किसानों को जागरूक करने एवं उल्लंघन की स्थिति में तत्काल प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने किसानों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें एवं नरवाई जलाने से बचें, ताकि स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखा जा सके। हालांकि आदेश के बावजूद भी लोगों में जागरुकता नहीं दिख रही है।
दमकल वाहन की कमी बन रही रोड़ा
शनिवार को छपारा क्षेत्र में लगी आग ने भीषण रूप ले लिया। गनीमत रही कि आग लोगों के घरों एवं दुकानों तक नहीं पहुंची। वहीं कोई जनहानी नहीं हुई है। अक्सर यह देखने में आ रहा है कि आग लगने के काफी देर बाद दमकल वाहन मौके पर पहुंच रही है। शनिवार को भी समय लगा। जिले में महज 8 फायर बिग्रेड गाडिय़ां हैं। इनसे 645 ग्राम पंचायत में आगजनी की घटनाओं की रोकथाम हो रही है। बड़ी बात यह है कि जिले में कई ऐसे संकरी गलियां हैं जहां आग लगने के बाद वाहनों का पहुंचना मुश्किल है। हर एक ब्लॉक में कम से कम तीन अग्निशामक वाहनों का होना जरूरी है। संसाधन कम होने से क्षति किसानों को झेलनी पड़ रही है। हर साल लाखों की फसल जलकर राख हो रही है।
गांवों में प्राथमिक अग्निशमन उपकरण जरूरी
ग्रामीणों की मांग है कि हर ब्लॉक स्तर पर पर्याप्त दमकल वाहन तैनात किए जाएं और गांवों में प्राथमिक अग्निशमन उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि समय रहते आग पर काबू पाया जा सके।
इनका कहना है…
जिले में नरवाई जलाने के एक मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है। शेष प्रकरण अभी लंबित हैं। जल्द ही इन पर कार्रवाई कराई जाएगी। नरवाई जलाने से खेतों को ही नुकसान हो रहा है। लोगों को यह बात समझनी चाहिए।
एसके धुर्वे, उपसंचालक, कृषि विभाग, सिवनी