सिवनी

Pench tiger reserve: पेंच में बाघों की बढ़ रही दहाड़, मानव-वन्यजीव संघर्ष चुनौती

जानकारों की मानें तो जंगलों में जनसंख्या के दबाव से घास भूमि न बचने के कारण हिरण, खरगोश समेत अन्य शाकाहारी जीवों की कमी हो गई है। जबकि यही बाघों का भोजन है। जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन बिगडऩे से बाघ जैसे वन्य प्राणी अब आबादी क्षेत्र में मौजूद गाय, बकरी को अपना भोजन बना रहे हैं। कभी-कभी यह मानवों को भी अपना शिकार बना रहे हैं।
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Jul 29, 2026
patrika news

आए दिन बाघ के हमले से ग्रामीणों की हो रही मौत

सिवनी. पेंच टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता मानी जा रही है। वर्तमान में पेंच के जंगल में लगभग 130 बाघ हैं। बेहतर संरक्षण, अनुकूल आवास और प्रभावी निगरानी के चलते बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि बाघों की बढ़ती संख्या के साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। जंगल से लगे गांवों में बाघों की आवाजाही बढऩे से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। मवेशियों पर हमले, खेतों के आसपास बाघों की मौजूदगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं समय-समय पर सामने आ रही हैं। ऐसे में वन विभाग के सामने बाघों के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी बड़ी जिम्मेदारी बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बफर क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने, ग्रामीणों को जागरूक करने, शीघ्र सूचना प्रणाली विकसित करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के प्रभावी उपायों से ही संरक्षण और जनसुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जा सकता है। बाघों की बढ़ती दहाड़ जितनी प्रकृति के लिए सुखद है, उतना ही जरूरी है कि इंसानी सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ें। विशेषज्ञों के अनुसार लोगों की लापरवाही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को बढ़ाने का कारण बन रही है। वन विभाग द्वारा लगातार चेतावनी और जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद कई लोग बिना अनुमति जंगल में प्रवेश कर रहे हैं। इससे न केवल उनकी जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

बीते कुछ वर्षों में बाघ के हमले की घटनाएं
बीते 14 जून 2026 को एक ही दिन में जंगल में बाघ के हमले में दो महिलाओं की मौत हो गई थी। पहली घटना सिवनी दक्षिण वन मंडल के कुरई वन परिक्षेत्र अंतर्गत जिलापुर गांव के पास जंगल में हुई। गांव निवासी शांति बाई कुमरे(55)जंगल में गुल्ली बिनने गई हुई थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे बाघ ने उन पर अचानक हमला कर दिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं बरघाट विकासखंड के ग्राम पंचायत मऊ अंतर्गत बीजाटोला में खेत में काम कर रही सेवबती मर्सकोले(43) पर बाघ ने हमला कर दिया। जिससे उनकी मौत हो गई थी। वहीं 2 अप्रेल 2026 को पेंच नेशनल पार्क छिंदवाड़ा क्षेत्र के कुंभपानी वन परिक्षेत्र बीट रमपुरी के बफर जोन में ग्रामीणों के साथ महुआ बीनने गए महेन्द्र मांडेकर की बाघ के हमले में मौत हो गई थी। वहीं 31 दिसंबर 2025 को पूर्व वनमंडल के चौरई अंतर्गत पेंच पार्क के बफर जोन के पास वन्यप्राणी के हमले से बिछुआ ब्लॉक के ग्राम किशनपुर निवासी 59 साल के बलराम डेहरिया का उसके खेत के पास ही शव मिला था। 6 जनवरी 2026 को पेंच टाइगर रिजर्व के छिंदवाड़ा क्षेत्र स्थित गुमतरा कोर वन परिक्षेत्र में बीट छेडिया के महादेव घाट के पास एक व्यक्तिका शव मिला था। बाघ के हमले में उसकी मौत हुई थी। वहीं वर्ष 2025 में 20 जून को सिवनी के बामनथड़ी गांव के पिंडरई बुट्टे निवासी सुमित पंद्रे पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी के परिक्षेत्र रूखड़ बफर में मवेशी चराने गए थे। इसी दौरा झाड़ी में झुपे बाघ ने उन पर हमला कर दिया। जिससे मौके पर मौत हो गई थी।

वर्ष 2024 में भी कई घटना
वर्ष 2024 में बालाघाट-सिवनी सीमा में खवासा वन परिक्षेत्र के सिल्लारी गांव में 22 दिसंबर को खेत में काम करने पहुंचे बालाघाट के एक किसान सुखराम उइके(55) एवं 19 अक्टूबर को खवासा वन परिक्षेत्र के चिखली गांव निवासी आदित्य पुत्र यादोराव चावरे(22) एवं 29 नवंबर को पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ बफर में बावनथड़ी गांव के जंगल में 20 वर्षीय युवक कृष्ण कुमार भलावी को बाघ ने हमला कर दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई।

फैक्ट फाइल
पेंच टाइगर रिजर्व का क्षेत्र-1170 क्वायर किमी
पेंच में बाघों की संख्या-130(लगभग)
लैपड की संख्या-175

इनका कहना है…
पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा गांवों में कई जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। गतिविधियों के माध्यम से लोगों को यह समझाया जा रहा है कि बाघ दुश्मन नहीं बल्कि दोस्त हैं। अधिकतर मामले में यह देखने में आया है बाघ आबादी वाले क्षेत्रों में नहीं पहुंचे हैं। लोग तेंदूपत्ता तोडऩे, महुआ बीनने, पशु चराने सहित अन्य वजह से जंगल में जाते हैं। बाघ कभी मानव पर हमला नहीं करता। वह तभी हिंसक होता है जब उसे लगता है कि जान का खतरा है।
पुनीत गोयल, डिप्टी डायरेक्टर, पेंच टाइगर रिजर्व

Updated on:
29 Jul 2026 04:38 pm
Published on:
29 Jul 2026 04:38 pm