- छपारा क्षेत्र में जल गंगा संवर्धन अभियान की हो रही खानापूर्ति
छपारा. वैनगंगा नदी समय के साथ अपने अस्तित्व को खो रही है। वेग थम रहा है और हालात ये हैं कि नदी के दोनों ओर बड़े हिस्से में सूखे जैसे हालात नजर आ रहे हैं। इस ओर जनप्रतिनिधि और शासन-प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है। वर्तमान का नजारा तस्वीरों में देखकर हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जनपद छपारा की 51 ग्राम पंचायतों के 159 ग्रामों में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल गंगा संवर्धन अभियान 5 से 16 जून तक क्षेत्र के नदी, तालाब, कुओं और बावड़ी सहित सभी जल स्रोतों के जीर्णोद्धार एवं साफ -सफाई स्थानीय प्रशासन व जन भागीदारी से किया जा रहा है। परंतु न तो छपारा नगर परिषद और ना ही जनपद की 51 ग्राम पंचायतों के 159 गांवों में इस अभियान को लेकर गंभीरता से नहीं लिया गया। जहां जमीन पर कोई सार्थक प्रयास न किया जाकर स्थानीय प्रबंधन ने सिर्फ फोटो खिंचवाकर रस्म अदायगी कर अभियान का काम पूरा कर दिया है। जबकि अभियान की महत्ता इसी बात से लगाई जा सकती है, कि जहां क्षेत्र में कभी 38 और 39 डिग्री सेल्सियस तापमान अधिकतम दर्ज होता था इस वर्ष 44-.45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
नगर परिषद छपारा ने बस स्टैंड परिसर में जल गंगा संवर्धन अभियान के कुछ पोस्टर-होर्डिंग्स, फोटो लटकाकर अपनी जिम्मेदारी को नगर के समीप से बहने वाली बैंनगंगा नदी के प्रति दर्शा दिया है। ज्ञात हो कि नदी घाट पर जमी सिल्ट की सफाई नहीं होने से नदी उथली हो गई है। बारिश के कुछ ही महीनों बाद पानी का स्तर तेजी से नीचे चला जाता है, जिससे वैनगंगा नदी सिमट कर रह जाती है।
फोटो खिंचवाकर अभियान का दिखावा-
जनपद पंचायत छपारा की ग्राम पंचायत में नदी-नाले, कुआं, तालाब किनारे सफाई करने के केवल फोटो खिंचवाकर जल गंगा संवर्धन अभियान की रस्म अदायगी की जा रही है। जानकारी के मुताबिक रोजगार गारंटी योजना 2005-06 से प्रारंभ हुई है, तब से वर्तमान तक छपारा जनपद क्षेत्र की पंचायतों में स्टापडेम, तालाब, घाट के नाम पर अब तक करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन ना तो जल संरक्षण हुआ है और ना ही कोई नए जल स्रोत बढ़े हैं। छपारा जनपद क्षेत्र में ठेकेदारी प्रथा ने सैकड़ों अभियान और योजनाओं को जमींदोज कर दिया है।
वैनगंगा नदी का नही हो रहा बचाव-
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों में वैनगंगा नदी के साथ-साथ आस-पास के जल स्रोतों के जीर्णोद्धार कर सहेजने की कोई जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है। जिला प्रशासन को इस अभियान को लेकर गंभीरता पूर्वक लेते हुए समीक्षा करने की अत्यंत आवश्यकता है। क्योंकि वैनगंगा नदी में बरसों से जमी सिल्ट के कारण जल भराव में कमी आई है। ना तो कभी सिल्ट उठाने के सार्थक प्रयास किए गए और ना ही जल संरक्षण को लेकर स्थानीय निकाय जवाब देह है।