पढि़ए पूरी खबर...
शहडोल- कांग्रेस ने शहडोल में अपना चेहरा बदल लिया है। नरीज द्विेदी की जगह सुभाष गुप्ता को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। बदलाव की सुगबुगाहट तो लंबे समय से चल रही थी, लेकिन मंगलवार को इससे पर्दा उठ गया। कांग्रेस ने शहडोल सहित कई अन्य जिलों के भी अध्यक्ष बदले हैं। इस आशय का पत्र मंगलवार को जारी कर दिया गया है।
ये तो पहले से तय था कि शहडोल में कांग्रेस अपना जिलाध्यक्ष जल्द बदलेगी। ये बात तब और पुख्ता हो गई थी, जब अजय सिंह ने अपने शहडोल प्रवास के दौरान संगठन की कमजोरी पर सार्वजनिक रूप से नाखुशी जाहिर कर दी थी। तब से ही कांग्रेस के कई बड़े दिग्गज ये पद पाने की होड़ में लगे हुए थे। हालांकि सुभाष गुप्ता का नाम बहुत लोगों के लिए चौंकाने वाला है।
कुछ लोगों ने दबी जुबान से अपनी नाराजगी भी जाहिर कर दी है। चौंकाने वाला इस मायने में, क्योंकि सुभाष गुप्ता के निष्कासन का पत्र अगस्त 2017 में ही जारी कर किया गया था। उस पत्र में नगर पालिका चुनाव के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप लगाया गया था। उस पत्र में छह साल से निष्कासन का जिक्र था। पार्टी के इस निर्णय को लेकर कांग्रेस में विरोध की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
कमलनाथ के करीबी माने जाते हैं सुभाष
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के इस निर्णय के बाद यह चर्चा आम हो गई है कि सुभाष को कमलनाथ का करीबी होने का फायदा मिला है। सुभाष गुप्ता शुरू से ही कमलनाथ के खेमे में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में कमलनाथ को प्रदेश की कमान मिलने के बाद उनके करीबियों को मौका मिलेगा, इसकी अटकलें पहले से लगाई जा रहीं थीं।
ये थे अध्यक्ष पद की होड़ में
जिला कांग्रेस कमेटी में एक लंबे अर्से से सेवा दे रहे दुर्गा यादव व शिव कुमार भी जिलाध्यक्ष पद की होड़ में थे। वहीं यूथ कांग्रेस से प्रदेश स्तर की कमेटी में शामिल हरीश अरोरा बिट्टू व जिले में लगभग 20 वर्ष से कई पदों में रहने के साथ ही सक्रिय भूमिका निभाने वाले बलमीत सिंह खनूजा भी जिलाध्यक्ष पद की होड़ में बताए जा रहे थे। वहीं प्रबल दावेदार के रूप में उभरकर सामने आए आजाद बहादुर सिंह व प्रदीप सिंह को भी पार्टी ने दरकिनार करते हुए नीरज द्विवेदी के स्थान पर विधानसभा चुनाव से पहले सुभाष गुप्ता के हाथ में जिले की बागडोर सौंपी है।
रविंद्र तिवारी की पार्टी में वापसी कब?
सुभाष गुप्ता के जिलाध्यक्ष बनते ही पार्टी में तुरंत इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि अब रविंद्र तिवारी की वापसी कब? माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी के बड़े नेता कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए बाहर किए गए नेताओं के प्रति नरम रवैया अख्तियार कर सकते हंै, जिससे रविंद्र तिवारी की जल्द वापसी की चर्चाएं शुरू हो गईं हैं।
इधर सोशल मीडिया पर विरोध के स्वर
सुभाष गुप्ता की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर विरोध के सुर भी दिखाई देने लगे। कई लोगों ने खुद को कांग्रेस का कार्यकर्ता बताते हुए गुप्ता की ताजपोशी का विरोध किया है। वजह नगर पालिका में उनके पार्टी विरोधी रुख को बता रहे हैं।
इसलिए बनाए गए अध्यक्ष
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया के मुताबिक पार्टी ने निष्कासित किया था लेकिन निष्कासन रद्द कर दिया गया हैै। प्रारंभ से ही कांग्रेस से जुड़े रहे हैं जिसके आधार पर ही प्रदेश स्तर के लीडरों ने निर्णय लिया होगा।