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कमता हादसा: कार पलटने की बात नहीं हो रही है हजम, मृतकों के शरीर पर आईं थीं मामूली चोटें!

पुलिस की भूमिका संदिग्ध, 5 किलो गांजा के पीछे कई अनसुलझे राज!शहडोल. जैतपुर थाना क्षेत्र के कमता में एक कुएं से तीन युवकों के शव मिलने का मामला और गहराता जा रहा है। प्रथम दृष्टया सडक़ हादसा नजर आने वाली यह घटना अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। डायल 112 […]

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पुलिस की भूमिका संदिग्ध, 5 किलो गांजा के पीछे कई अनसुलझे राज!
शहडोल.
जैतपुर थाना क्षेत्र के कमता में एक कुएं से तीन युवकों के शव मिलने का मामला और गहराता जा रहा है। प्रथम दृष्टया सडक़ हादसा नजर आने वाली यह घटना अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। डायल 112 की टीम की सक्रियता और उसके बाद जैतपुर पुलिस की तरफ से तथ्यों को घुमाने के प्रयासों ने पूरे मामले में संदेह पैदा कर दिया है। आधी रात बिना किसी ग्रामीण को सूचना दिए आनन-फानन में कार को जब्त कर थाने ले जाना और मौके से एक अन्य लग्जरी कार का मिलना, इस पूरी कहानी की दिशा ही मोड़ दी है।

आधी रात ऑपरेशन और लग्जरी कार का रहस्य

घटनास्थल पर पुलिस की भूमिका शुरू से ही सवालों के घेरे में है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इतने भीषण हादसे के बावजूद न तो कार के एयर बैग खुले और ना ही दरवाजे लॉक हुए, जो सामान्यत: ऐसे हादसों के लिए सुरक्षा देने के लिए बनाए जाते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने मौके से एक अन्य लग्जरी कार भी जब्त की है, लेकिन उसके बारे में जानकारी देने से बच रही है। पुलिस केवल उसे संदिग्ध वाहन बताकर पल्ला झाड़ रही है। सवाल उठ राह है कि आखिर वह दूसरी कार किसकी थी और इस हादसे से उसका क्या संबंध है? रात के अंधेरे में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए बिना कार को मौके से हटाना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है।

पहचान और गांजा की थ्योरी पर सवाल

मृतक तनुज शुक्ला, सचिन सिंह बघेल और रोहित शर्मा के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने कुएं से शव निकाले बिना ही उनकी पहचान कैसे कर ली, साथ ही पुलिस मृतकों को बिना पूर्ण विवेचना के गांजा तस्कर करार दिए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के अनुसार, दो युवकों का कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है, केवल रोहित शर्मा के विरुद्ध पूर्व के कुछ गांजा तस्करी के मामले हैं।

गले नहीं उतर रही कहानी

रोहित पहले से गांजा के अवैध धंधे में संलिप्त था। सूत्रों की मानें तो वह बड़े स्तर पर गांजा की सप्लाई करता था। क्या साढ़े 5 किलो गांजा की बरामदगी वास्तव में हुई है या यह पुलिस की तरफ से कहानी गढऩे का हिस्सा है? युवकों के शरीर पर मामूली चोट के निशान हैं, जबकि क्षतिग्रस्त कार की हालत देखने पर ऐसा नहीं लगता कि इसमें से सुरक्षित निकल पाना संभव हो। अगर वह कार पलटने के बाद सुरक्षित निकल भी आए होंगे तो तीनों कुएं कि दिशा में ही क्यों भागे होंगे, जबकि आसपास खेत और खुला मैदान था।

अनसुलझे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में कुछ ऐसे बिंदु हैं जो जांच की दिशा को पुलिस की ओर ही मोड़ रहे हैं।
मदद की कमी: अगर डायल 112 की टीम ने कार को पलटते देखा था, तो तत्काल रेस्क्यू क्यों नहीं किया। क्या पुलिस ने उन्हें कुएं में गिरते देखा और मूकदर्शक बनी रही?
ड्यूटी का रहस्य: पुलिस यह बताने को तैयार नहीं है कि उस रात डायल 112 में किन कर्मियों की ड्यूटी थी। आखिर नाम छिपाने के पीछे क्या मंशा है?
मोबाइल और कैश: मृतकों की जेब से मोबाइल फोन और नकदी बरामद हुई है, जिसकी जांच सायबर सेल कर रही है। क्या इन फोनों में हादसे से पहले का कोई बड़ा राज छुपा है? पुलिस के अनुसार मृतकों की जेब से 1 लाख रुपए नकद बरामद हुआ है।
वरिष्ठ अधिकारियोंं को देरी से सूचना: इतने बड़े मामले में रात में ही एसपी या अन्य आला अधिकारियों को सूचित क्यों नहीं किया गया?, सुबह विवेचना क्यों शुरू की गई।

इनका कहना है
घटना की जानकारी लगते ही मैं मौके पर गया था, पुलिस टीम को जांच के निर्देश दिए हैं, जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रामजी श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक शहडोल