
शहडोल. समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने की आस लगाए बैठे किसानों के लिए तकनीक वरदान के बजाय अड़चन साबित हो रही है। उपार्जन केंद्रों में इन दिनों गेहूं खरीदी शुरू होने से पहले ही सर्वर की सुस्त रफ्तार और सैटेलाइट सत्यापन में तकनीकी खामियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी दावों के विपरीत, पोर्टल पर आ रहे असत्यापित के मैसेज ने हजारों किसानों की नींद उड़ा दी है। फिलहाल, अन्नदाता सरकारी सिस्टम और सैटेलाइट के इस मकडज़ाल में उलझा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन तकनीकी खामियों को कितनी जल्दी दूर कर किसानों को राहत पहुंचाता है।
जिले में कुल 9,526 पंजीकृत किसान हैं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते अब तक केवल 7,084 किसान ही अपना स्लॉट बुक कर पाए हैं। करीब 2,500 किसान ऐसे हैं जो दिन-रात ऑनलाइन केंद्रों और सोसायटियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर उनकी जानकारी अपडेट नहीं हो पा रही है।
स्लॉट बुकिंग के दौरान किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या सैटेलाइट द्वारा असत्यापित या किसान कोड सत्यापन अपूर्ण जैसे मैसेज आ रहे हैं। शुरुआत में 8,700 खसरों में सैटेलाइट मैपिंग को लेकर विसंगतियां पाई गई थीं। प्रशासनिक जांच के बाद अधिकांश मामलों का निराकरण तो हुआ, लेकिन 46 खसरों में रिकॉर्ड के उलट फसल पाई गई। हैरानी की बात यह है कि जिन किसानों की फसल मौके पर सही है, उन्हें भी तकनीकी ग्लिच के कारण दोबारा सत्यापन के लिए भटकना पड़ रहा है।
सर्वर की धीमी गति: स्लॉट बुकिंग के दौरान पोर्टल का बार-बार कैश होना।
सत्यापन का फेर: सैटेलाइट डेटा और जमीनी हकीकत में अंतर होने से तकनीकी रुकावट।
अपूर्ण किसान कोड: पुराने डेटा और नए पंजीकरण के बीच मिलान न होना।
तैयारी कर ली थी, लेकिन जैसे ही स्लॉट बुकिंग करने गया, वहां लिखा आता है कि सैटेलाइट से सत्यापन नहीं हुआ है। पटवारी के पास जाओ तो वो तहसील भेजते हैं, समझ नहीं आ रहा अनाज मंडी ले जाएं या दफ्तरों के चक्कर काटें।
रहसू पटेल, किसान ग्राम अमरहा
Updated on:
09 May 2026 12:17 pm
Published on:
09 May 2026 12:17 pm
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