शहडोल

गौ-सेवक बोलते है – घायल पशुओं पर कारगर सावित नहीं हो रही सरकारी पशु अस्पताल की दवा

सुबह फोन लगाओं तो दूसरे दिन भी नहीं पहुंचते चिकित्सक
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Gauvevalkar speaks - the government hospital's medicines not being eff
गौ-सेवक बोलते है - घायल पशुओं पर कारगर सावित नहीं हो रही सरकारी अस्पताल की दवा


गौ-सेवक बोलते है - घायल पशुओं पर कारगर सावित नहीं हो रही सरकारी अस्पताल की दवा


शहडोल. सड़क पर आवारा विचरण करते पशु रोज शहर में दुर्घटना का शिकार हो रहे है। जिनके इलाज के लिए कामधेनु गौ-सेवा संस्थान वीणा उठाया है। इसके लिए गौ -सेवक सूचना पर तत्काल दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर गौ- सेवा कर रहे है। लेकिन चिकित्सक फोन लगाने पर भी समय पर नहीं पहुंच रहे है। इतना ही नहीं घायल पशुओं पर सरकारी पशु चिकित्सालय की दवा भी कारगर सावित नहीं हो रही है। जिससे गौ सेवकों को जेब का पैसा खर्चकर पशुओं की देख भाल करनी पड़ रही है।
गौ सेवको ने बताया कि शहर में एक दो मवेश रोज ट्रेन व भारी वाहनों की चपेट में आ रहे है। जो मौके पर ही कराहते पड़े रहते है। जिसके इलाज के लिए कामधेनु संस्थान के दो दर्जन से अधिक गौ-सेवक निस्वार्थ जिले की दस किलोमीटर की सीमा तक काम कर रहे है। सूचना पर तत्काल गौ-सेवक घटना स्थल पर पहुंचकर इलाज का इंतजाम करवाते है। लेकिन फील्ड के लिए तैनात किया गया पशु चिकित्साल य का मोबाइल वाहन समय पर नहीं पहुंचता है। जिसके चलते कई गाय बैलों की मौत तक हो जाती है। गौ-सेवक सेवा तो कर लेते है। लेकिन उनके पास इलाज की जानकारी न होने से पीडि़त पशुओ को समय पर इलाज नहीं हो पाता । दुर्घटना स्थल पर जब तक पशु चिकित्सको की टीम पहुचती है। तब तक घयल मवेशी और गम्भीर हो जाती है। चिकित्सकों के पास जो सरकारी दवाईयां होती है। उससे बीमार पशु ठीक भी नहीं हो पाते। जिससे गौ सेवको को हैसियत न होने पर भी दवा बाजार से खरीद कर अपना सेवा सकल्प पूरा कर रहे है।
अस्पताल में भर्ती करने का नहीं है इंतजाम
संभागीय पशु चिकित्सालय में सड़क में घायल पशु और गाय को अस्पताल तक लाने के लिए कोई वाहन तक नहीं है। दुर्घटना में घायल होने से जब कभी सीरियस गाय को गौ-सेवक किराए के वाहन से अस्पताल पहुंचा देते है तो ठीक से उसका इलाज भी नही हो पाता है। घायल मवेशियों के लिए अस्पताल में दाना चारा का कोई इंतजाम नहीं है। छुट्टी के दिन डाक्टर भी अस्पताल नहीं आते। जिसके कारण एक गाय की अस्पताल में15 अगस्त को मौत हो चकी है। दूसरी गाय दो दिन पहले समुचित इलाज न होने से दम तोड़ चुकी है। अस्पताल में रात को पानी, विजली का भी इंतजाम नहीं रहता। अस्पताल में टूटी हड्डी काटने के लिए आरी तक नहीं है। अभी हाल ही में एक गाय की हड्डी काटने के लिए प्राइवेट आरी मगाई गई थी। तब जाकर गाय के पैर की हड्डी काटी जा सकी थी। जिससे चलते अस्पताल में भी घायल गाय बैल की देख भाल गौ-सेवकों को ही करनी पड़ रही है।

Updated on:
26 Oct 2018 07:39 pm
Published on:
26 Oct 2018 07:39 pm