12 जुलाई 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

उमरिया : खस्ताहाल सडक़ के कारण गांव तक नहीं पहुंची एम्बुलेंस, प्रसूता को कंधे में उठाकर ले जाना पड़ा

उमरिया जिले से स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोलती एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। प्रसूता को प्रसव पीड़ा उपरांत हाथों में उठाकर परिजन और ग्रामीण अस्पताल ले जा रहे हैं।
2 min read
Google source verification
mp news

प्रसूता को उठाकर ले जाते परिजन

उमरिया जिले के बैगा बहुल गांव देवरा से एक तस्वीर आई है, जो उस व्यवस्था पर एक तमाचा है जो हर साल बारिश के पानी में बह जाती है। देवरा गांव में सुनील रौतेल की पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो उम्मीद की एक किरण 108 एम्बुलेंस के रूप में जगी। फोन किया गया, एम्बुलेंस आई भी, लेकिन गांव की दहलीज तक नहीं पहुंच सकी। वजह कच्ची सडक़ पर पसरा जानलेवा कीचड़। एम्बुलेंस सडक़ पर खड़ी रह गई और अंदर एक मां, मौत और जिंदगी के बीच झूल रही थी।


अपनों ने हार नहीं मानी

परिजनों ने प्रसूता को एक कपड़े की झोली में डाला गया और उसे कांधों पर उठा लिया गया। बारिश और कीचड़ के बीच इंसानी कदमों का यह संघर्ष किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि एक हकीकत है। कीचड़ से भरे रास्तों पर अपनों ने उसे कांधों पर ढोया, ताकि वह नेशनल हाईवे तक पहुंच सके, जहां एम्बुलेंस के दरवाजे उसके लिए खुले थे। उस दिन सिर्फ एक बच्चे का जन्म नहीं हुआ, बल्कि एक मां की ममता ने उस सिस्टम को मात दी, जो उसे समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा सका।


नहीं पहुंच पाते मरीज


आशा कार्यकर्ता लक्ष्मी सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में गांव तक पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है। खराब सडक़ के कारण कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि यदि सडक़ बेहतर होती तो एम्बुलेंस सीधे घर तक पहुंच सकती थी।

विकास के लिए तरस रहा शहीद का गांव


देवरा, जो देश के लिए शहीद हुए वीर सपूत स्वागत भूप सिंह का गांव है, आज खुद विकास के लिए तरस रहा है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के फाइलों में इस सडक़ के लिए करोड़ों का बजट मंजूर है। लेकिन, जमीन पर उतरते ही वह बजट शायद उसी कीचड़ में दब गया है। निर्माण की धीमी रफ्तार और प्रशासनिक उदासीनता ने आज पूरे गांव को मुख्यधारा से काट दिया है।


घटना का वायरल हो रहा वीडियो


इस घटना का वीडियो वायरल है। लोग शेयर कर रहे हैं, कमेंट कर रहे हैं। दावे किए जाते हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं अब हर घर के दरवाजे तक हैं। लेकिन देवरा की यह तस्वीर पूछती है-क्या जब एम्बुलेंस लाचार हो जाए और कांधे भारी पड़ जाएं, तब ग्रामीण अपनी जान कैसे बचाएं।