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810 ग्राम वजनी बेबी ने 87 दिन बाद जीती जिंदगी की जंग, शहडोल से आई दिल छूने वाली कहानी

Shehdol Medical College SNCU: शहडोल मेडिकल कॉलेज के SNCU में विशेषज्ञों के उपचार से मिली नई जिंदगी, 810 ग्राम के प्रीमैच्योर बेबी ने 87 दिन बाद जीती जिंदगी
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Shahdol SNCU Give New Life to Premature Baby Heart touching story

Shahdol SNCU Give New Life to Premature Baby Heart touching story: ्राम ककरहाई, तहसील सोहागपुर निवासी शिवानी अपने नवजात शिशु और पति के साथ, परिवार में लौट आईं खुशियां। (photo:patrika)

Shahdol SNCU Heart Touching Story: चिकित्सा विज्ञान, विशेषज्ञों की सतत निगरानी और मां के स्नेह ने एक बार फिर जीवन की उम्मीद को जीत दिलाई। शहडोल मेडिकल कॉलेज के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में भर्ती जन्म के समय मात्र 810 ग्राम वजन वाले एक अत्यंत प्रीमैच्योर नवजात ने 87 दिनों तक चली कठिन जीवन-यात्रा के बाद स्वस्थ होकर घर वापसी की।

पढ़ें पूरा मामला

ग्राम ककरहाई, तहसील सोहागपुर निवासी शिवानी के यहां समय से पूर्व प्रसव हुआ। जन्म के समय नवजात का वजन केवल 810 ग्राम था। अत्यधिक कम वजन और अपरिपक्व जन्म के कारण शिशु की स्थिति बेहद गंभीर थी तथा उसे तत्काल शहडोल मेडिकल कॉलेज के SNCU में भर्ती (Shahdol SNCU Admitted Premature Baby) किया गया।

आधुनिक नवजात चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत किया इलाज

SNCU की विशेषज्ञ टीम ने नवजात का उपचार आधुनिक नवजात चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार प्रारंभ किया। उपचार के दौरान शिशु को आवश्यकतानुसार श्वसन सहायता, संक्रमण की रोकथाम एवं उपचार, संतुलित पोषण, मां के दूध को प्राथमिकता तथा कंगारू मदर केयर (KMC) जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों का लाभ दिया गया। चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने 24 घंटे निरंतर निगरानी रखते हुए प्रत्येक चुनौती का समय पर सामना किया।

लगातार 87 दिन तक लड़ता रहा जंग

लगातार 87 दिनों (Shahdol SNCU Premature Baby Battle) तक चले उपचार के दौरान शिशु की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। उसका वजन बढ़ा, फीडिंग बेहतर हुई और सभी आवश्यक चिकित्सकीय मानकों में संतोषजनक प्रगति दर्ज की गई। चिकित्सकों द्वारा पूर्ण मूल्यांकन के बाद स्वस्थ अवस्था में शिशु को डिस्चार्ज कर दिया गया।

प्रीमैच्योर बेबी को भी दिया जा सकता है जीवन

शहडोल मेडिकल कॉलेज की नवजात चिकित्सा टीम (Shahdol SNCU Expert Team) का कहना है कि अत्यंत कम वजन वाले प्रीमैच्योर शिशुओं का उपचार चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन समय पर विशेषज्ञ उपचार, मां का दूध, कंगारू मदर केयर और परिवार के सहयोग से ऐसे बच्चों को भी स्वस्थ जीवन प्रदान किया जा सकता है।

SNCU के एक्सपर्ट बोले-

यह सफलता शहडोल मेडिकल कॉलेज के SNCU की विशेषज्ञ सेवाओं, टीमवर्क और गुणवत्तापूर्ण नवजात चिकित्सा का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह संदेश भी देती है कि समय पर रेफरल, वैज्ञानिक उपचार और समर्पित देखभाल से अत्यंत गंभीर अवस्था में जन्मे नवजातों (Shahdol SNCU Give New Life to Premature Baby) को भी नई जिंदगी दी जा सकती है।