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NHM का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा, MP के शहडोल में घूसखोर डॉक्टर की 2 सेवाएं और डबल सैलरी

shahdol Contractual Medical Officer fraud: NHM-मध्यप्रदेश में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, श्योपुर की नौकरी छोड़े बिना शहडोल में दूसरी नियुक्ति ली, दोनों जिलों में सेवाएं देकर दो पदों का वेतन भी ले रहा खा संविदा मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेशचंद शर्मा।
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शहडोल

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Sanjana Kumar

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कमलेश रजक

Jul 06, 2026

shahdol doctor fraud case

shahdol doctor fraud case: NHM का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, संविदा मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद शर्मा एक साथ दो जिलों में कर रहा था नौकरी। (photo: patrika creative)

shahdol Contractual Medical Officer fraud: ज्यादा दिन नहीं बीते हैं, जब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मध्यप्रदेश में फर्जी डिग्री रजिस्ट्रेशन के सहारे संविदा डॉक्टरों की नौकरी का मामला सामने आया है। दमोह से खुले मामले में विभिन्न जिलों से करीब 12 फर्जी डॉक्टर और दो अन्य आरोपी पकड़े गए। अब इनसे भी बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा शहडोल में हुआ है।

बीते शुक्रवार को 5000 रुपए घूस लेते पकड़ाया

संविदा मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेशचंद शर्मा दो जिलों में नौकरी कर रहा था। शहडोल जिले के जयसिंहनगर ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उफरी में और श्योपुर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहसराम में। दोनों जिलों के अफसर नियुक्ति, उपस्थिति, वेतन भुगतान और सेवा अभिलेखों की जांच में जुटे हैं। पता चला कि डॉ. शर्मा ने 2020-21 में सहसराम में पदभार ग्रहण किया था। आरोप है, वहां की सेवा समाप्त किए बिना 2024 में उफरी में भी नियुक्ति (shahdol Contractual Medical Officer fraud hold Two Jobs)ले ली। सवाल है, दोनों जगह सेवा अभिलेख सक्रिय थे, तो एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग की डिजिटल निगरानी व्यवस्था इसे पकड़ क्यों नहीं सकी।

दोनों CMHO ने मांगे रिकॉर्ड

श्योपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने शहडोल से डॉ. शर्मा की पदस्थापना, उपस्थिति, वेतन भुगतान और सेवा संबंधी सभी दस्तावेज तलब मांगे हैं। दोनों जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच समन्वय बनाकर मिलान किया जा रहा है।

यह भी जांच का विषय

विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच (shahdol Contractual Medical Officer fraud Investigation) के दौरान डॉक्टर की गतिविधियों का संबंध गुजरात और उत्तरप्रदेश के आगरा से भी सामने आया है। अधिकारी पता लगा रहे हैं कि इन स्थानों से उसका संबंध निजी मेडिकल प्रैक्टिस, प्रशिक्षण, अन्य पेशेवर गतिविधियों या किसी अन्य कारण से था। जांच के दायरे में अब डॉक्टर की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल डिग्री, पंजीयन, नियुक्ति प्रक्रिया तथा सेवा अभिलेख भी हैं। इनका सत्यापन किया जाएगा। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हाल ही में एनएचएम-मध्यप्रदेश के जरिए विभिन्न जिलों में नियुक्त संविदा डॉक्टरों का फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। कथित डॉक्टरों ने फर्जी डिग्रीरजिस्ट्रेशन के जरिए नियुक्तियां पाईं। इसके बाद एनएचएम ने प्रदेशभर में ऐसी नियुक्तियों में दस्तावेज सत्यापन के निर्देश दिए।

रिश्वत नहीं लेता तो, पता नहीं चलता

रीवा लोकायुक्त ने डॉ. शर्मा को घूस लेते दबोचा तो उसकी फोटो सोशल मीडिया (shahdol Contractual Medical Officer fraud Viral) में वायरल हुई। जानकारी श्योपुर पहुंची। स्वास्थ्य विभाग की जांच में डॉ. शर्मा के सहसराम में पदस्थ होने का पता चला। तब शहडोल सीएमएचओ से बातचीत की गई।

सुलगते सवाल (shahdol Contractual Medical Officer fraud Case)

- दोनों जिलों में नियुक्ति के लिए एक जैसे दस्तावेजों का उपयोग किया गया या अलग-अलग?

- दोनों स्थानों पर वेतन स्वीकृति, सेवा रिकॉर्ड कैसे संचालित हुए?

- डॉ. शर्मा कई माह से ऑनलाइन नियमित हाजिरी दर्ज नहीं कर रहा था, इसकी क्या वजह है?

- 5 माह से वेतन रुकने के बाद भी सेवा स्थिति और दूसरे जिले में तैनाती का पता क्यों नहीं चला?

मामला सच पाया गया तो होगी ठोस कार्रवाई

श्योपुर के सीएमएचओ ने डॉक्टर की जानकारी मांगी है। हमने भी उनसे इस संबंध में जानकारी मांगी है। जांच में प्रमाणित होता है कि दोनों स्थानों पर एक ही डॉक्टर ड्यूटी कर रहा था, तो ठोस कार्रवाई की जाएगी।

-डॉ. राजेश मिश्रा, सीएमएचओ, शहडोल।