शहडोल

मध्यप्रदेश के इन तीन सिंचाई परियोजनाओं में एनओसी बन रहा है बड़ा व्यवधान

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Updated: 13 Jun 2018, 2:47 PM IST
NOC is becoming a big distraction in three irrigation projects of mp
मध्यप्रदेश के इन तीन सिंचाई परियोजनाओं में एनओसी बन रहा है बड़ा व्यवधान

शहडोल- मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की तीन सिंचाई परियोजनाओं में सबसे बड़ा व्यवधान बन रहा है एनओसी, दरअसल वन विभाग की एनओसी के फेर में जिले की तीन महत्वपूर्ण और बड़ी सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य लंबे समय से अटका हुआ है।

वन विभाग का क्लीयरेंस और एनओसी के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारी वन विभाग के अधिकारियों और कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। बताया गया है कि जिले की पांच परियोजनाएं वन भूमि प्रभावित होने के कारण उनका निर्माण कार्य अटका हुआ था, जिसमें दो सिंचाई परियोजनाओं रिमार और दियापीपर की एनओसी तो मिल गई, लेकिन तीन परियोजनाओं की एनओसी अब तक नहीं मिली है, जिससे निर्माण कार्य में देरी हो रही है।


राजधानी में अटका है मामला

वन भूमि प्रभावित तीनों सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण कराने और वन भूमि प्रभावित होने के कारण यह मामला राजधानी स्थित डीजीएफ कार्यालय में अटका हुआ है। जानकारी में बताया गया है कि एनओसी के लिए सिंचाई विभाग ने वन मण्डल कार्यालय और सीसीएफ कार्यालय में अनुमति के लिए पत्र लिखा है, इसके बाद सीसीएफ कार्यालय द्वारा एनओसी के लिए भोपाल मुख्यालय को पत्र लिखा गया है, लेकिन अब तक एनओसी नहीं मिली जिससे निर्माण रुका हुआ है।

इन परियोजनाओं का अटका निर्माण

जानकारी में बताया गया है कि जिले की जिन तीन परियोजनाओं का निर्माण लगभग ६ महीने से वन विभाग की एनओसी और रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन प्रभावित होने से अटका हुआ है, उनमें से समधिन नदी सिंचाई परियोजना में लगभग 87 हैक्टेयर वन भूमि, और ओदारी डायवर्सन सिंचाई परियोजना में 39.49 हैक्टेयर तथा बिछली सिंचाई परियोजना में 8.6 हैक्टेयर रिजर्व फारेस्ट की जमीन प्रभावित होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। बताया गया है कि इन परियोजनाओं के निर्माण के लिए सिंचाई विभाग ने ठेकेदार से अनुबंध भी कर लिया है।

नहीं मिली एनओसी

सिंचाई विभाग के कार्यपालन यंत्री डीआर आकरे के मुताबिक जिले की तीन सिंचाई परियोजनाएं वन प्रभावित क्षेत्र में आने के कारण उनका निर्माण शुरू नहीं कराया गया है। एनओसी के लिए वन विभाग के
अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। एनओसी मिलने के बाद तीनों परियोजनाओं का निर्माण कराया जाएगा।

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