शहडोल

कलेवर बदलकर, नए तेवर के साथ लौट रहा रेडियो का दौर

विश्व रेडियो दिवस पर विशेष
2 min read
Feb 13, 2018
special on World Radio Day

बृजेश चन्द्र सिरमौर
शहडोल- रेडियो का दौर फिर से लौट रहा है, वह भी कलेवर बदलकर और नए तेवर के साथ। हालांकि रेडियो ने अपनी पुरानी अच्छी चीजों को आज भी सहेजा हुआ है। आदिवासी अंचल में आकाशवाणी शहडोल पिछले 18 मई 1992 से यानि पिछले पच्चीस वर्षों से आवाज के जादू को बिखेरता चला आ रहा है। इस क्षेत्र के हर वर्ग में इसने अपनी अमिट छाप बना रखी है। गांवों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं के साथ युवा इसके दीवाने हैं। जिसका प्रमाण आकाशवाणी शहडोल में प्रतिदिन आने वाले श्रोताओं के पत्र हैं। साथ ही फोन इन कार्यक्रमों के जरिए जुडऩे वाले श्रोताओ की चर्चाओं से भी पता चलता है कि रेडियो उनके जीवन का आवश्यक अंग है। वर्तमान में शहडोल के आकाशवाणी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की बागडोर तीन युवाओं ने संभाल रखी है। वह इस क्षेत्र के युवाओं का बेहतर मार्गदर्शन कर रहे हैं।

रेडियो में चुनौतियां ज्यादा हैं
प्रसारण निष्पादक प्रशांत परमार कहते हैं रेडियो में चुनौतियां ज्यादा हैं। इसलिए उन्होने रेडियो से अपने कैरियर की शुरूआत की। रेडियो में लोगों से जुडऩे की बहुुत संभावनाएं हैं। रेडियो युग का पुनर्जागरण हो रहा है। जो भविष्य में एक बेहतर साधन के रूप में उभरकर सामने आएगा।

देश दुनिया से अपडेट रहने के लिए आकाशवाणी बेस्ट
प्रसारण निष्पादक प्रकाश कुमार का मानना है अगर देश दुनिया की खबरों से हमेशा अपडेट रहना है तो आकाशवाणी से बेहरतर दूसरा कोई माध्यम नहीं हो सकता है। इसके माध्यम से साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों का बेहतर संचालन किया जा सकता है।

करियर बनाने का अच्छा प्लेटफॉर्म
प्रसारण निष्पादक धीरज कुमार के मुताबिक युवाओं को अपना कैरियर बनाने बेहतर प्लेटफार्म रेडियो है। जिसके जरिए वह युवाओं का बेहरत मार्गदर्शन कर रहे हैं। वह युववाणी कार्यक्रम में अपने अनुभवों का साझा कर प्रतियोगी प्रश्नों की जानकारी प्रदान करते हैं।

उपलब्धियों से भरा आकाशवाणी शहडोल
- वर्ष 2000 में साक्षरता पर आधारित संगीतमय रूपक साजन से लड़ूगीं को मिला आकाशवाणी वार्षिक का द्वितीय पुरस्कार।
- वर्ष 2001 में कन्या भ्रूण हत्या पर केन्द्रित संगीतमय रूपक एक अजन्मे की मौत को आकाशवाणी वार्षिक पुरस्कार में प्रशस्त्रि पत्र।
- वर्ष 2004 में बेहरत रख-रखाव के लिए टेक्निकल एक्सीलेंस का पुरस्कार।

Published on:
13 Feb 2018 03:38 pm