
शहडोल- यूं तो जादूगर आनंद के शो में जादू की धूम होती है, लेकिन कल उनके शो में आजादी का जिक्र था। उन्होंने कहा गांधीजी ने देश को आजादी दिलाने 1942 को बड़ा आंदोलन छेड़ा था। देश आजाद हो गया, और आगे भी बढ़ रहा है। लेकिन एक बड़ा तबका अब भी मानसिक बुराईयों, कुरीतियों का गुलाम है, व्यसनों की परतंत्रता उसे जीने नहीं दे रही है। इन बुराइयों से आजादी भी आज समय की मांग है। इसके लिए गांधीजी की तरह ही करो या मरो का नारा स्वयं को देना पड़ेगा। करो या मरो का आशय जुनून से है।
हमें अपनी बुराईयों से आजादी, नशे से आजादी, कुरीतियों से आजादी, भ्रष्टाचार से आजादी के लिए करो या मरो अर्थात कुछ करना पड़ेगा, जूझना पड़ेगा सिस्टम से। अपने अंदर का सिस्टम सबसे पहले सुधारना जरूरी है। आनंद ने कहा कि ऐसा किसी जादू से नहीं होगा। ऐसा अपने द्वारा किए गए सद्प्रयास से होगा। जादूगर की बातें जादू सी लगीं लोगों के दिलों में। उन्होंने तालिया बजाकर इसे स्वीकारा और आत्मसात करने का वचन भी दिया।
आजादी की बातों के बाद आनंद ने जादू का पिटारा खोला। आनंद दर्शकों से स्वयं आग्रह करते हैं, कि वे उनका जादू ध्यान से देखें और ये जानने का प्रयास करें कि मंच पर क्या हो रहा है। कई जादू तो वो चैलेंज के रूप में लोगों को दिखाते हैं। विश्व के ख्यातिलब्ध और चर्चित जादूगरों के जादुई खेलों में अपना हुनर जोड़कर वे उसे और भी यादगार बना देते हैं। आखरी बार शहडोल आए आनंद खूब सराहे जा रहे हैं। अपने
कारनामों के चलते हर वर्ग में लोकप्रिय् भी हो रहे हैं। उन्हें बडे-छोटे, महिला-पुरुष, गरीब-अमीर सबका प्यार मिल रहा है। वे कहते हैं कि लोकप्रियता तो देश के हर कोने में मिली है, लेकिन अपनी मातृ भूमि यानी भारत देश की भूमि पर जो प्रेम मिलता है, उसे प्रेम नहीं आशीर्वाद कहा जाना चाहिए।
बच्चों में उत्साह
दर्शकों की अजब-गजब की प्रतिकियाएं उनका मन मोह लेती हैं। शुरुआत में ही जादूगर आनंद अपनी उपस्थिति से दर्शकों को अचंभित कर देते हैं। जादुई बुक में यूं तो कुछ नहीं होता, लेकिन पन्ने पटलते ही उसमें से जादूगर आनंद अवतरित हो जाते हैं। इसके बाद शुरू होता है वो रोमांच जो करीब दो घंटे तक दर्शकों को एकाग्रचित्त रखता है। कई करतब तो ऐसे होते हैं जिसे देख दर्शकों की आंखे फटी की फटी रह जातीं हैं।