शहडोल

जानलेवा सफर: दुर्घटनाओं के बाद भी नहीं जाग रहा प्रशासन, मालवाहक में ढोई जा रही ओवरलोड सवारी

जिले में लगातार हो रहे सडक़ हादसों के बाद भी न तो वाहन चालकों की मनमानी थम रही है और न ही जिम्मेदार विभाग नींद से जाग रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय व आसपास के इलाकों में मजदूरी करने आने वाले श्रमिकों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है। हर रोज सुबह मालवाहक वाहनों व ऑटो में क्षमता से तीन से चार गुना अधिक मजदूरों को भेड़-बकरियों की तरह ठूस-ठूस कर खतरनाक घाटियों से होते हुए शहर लाया जा रहा है। यातायात विभाग की इस घोर उदासीनता के कारण कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है।

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Jun 19, 2026
सीमावर्ती क्षेत्रों से हर रोज जान जोखिम में डालकर शहर पहुंच रहे श्रमिक

शहडोल. जिले में लगातार हो रहे सडक़ हादसों के बाद भी न तो वाहन चालकों की मनमानी थम रही है और न ही जिम्मेदार विभाग नींद से जाग रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय व आसपास के इलाकों में मजदूरी करने आने वाले श्रमिकों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है। हर रोज सुबह मालवाहक वाहनों व ऑटो में क्षमता से तीन से चार गुना अधिक मजदूरों को भेड़-बकरियों की तरह ठूस-ठूस कर खतरनाक घाटियों से होते हुए शहर लाया जा रहा है। यातायात विभाग की इस घोर उदासीनता के कारण कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है।

मालचुआ से कोढार तक मौत के साए में आवागमन

क्षेत्र के मालचुआ, शाहपुर, पड़मनिया, खरसोल, कोढार और अहिरगवां सहित दर्जन भर से अधिक ऐसे गांव हैं, जहां से सुबह 9.30 से 10 बजे के बीच सैकड़ों मजदूरों को लेकर ये वाहन शहर में प्रवेश करते हैं। ये वाहन जिन रास्तों से गुजरते हैं, वहां खतरनाक घाटियां और मोड़ हैं, जहां जरा सी चूक दर्जनों परिवारों को तबाह कर सकती है। इसके बावजूद, यह सिलसिला वर्षों से बेरोकटोक जारी है।

कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता

इस मार्ग पर हादसे होना आम बात हो चुकी है। करीब 4 महीने पहले एक मालवाहक वाहन पलटने से 12 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि एक अन्य घटना में एक मजदूर को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।
आरोप है कि हादसे के बाद रसूखदार वाहन चालक गरीब मजदूरों के परिवारों पर दबाव बनाकर मामलों को रफा-दफा कर देते हैं। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि यातायात पुलिस व वाहन चालकों के बीच गठजोड़ के चलते सख्त कार्रवाई नहीं होती।
पुलिस कभी-कभार केवल चालानी कार्रवाई की औपचारिकता निभाकर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर लेती है।

700 से अधिक श्रमिकों का आवागमन

अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ और उमरिया के पाली ब्लॉक की सीमा से हर दिन 700 से अधिक मजदूर शहडोल व आसपास के क्षेत्रों में काम की तलाश में पहुंचते हैं। परिवहन के पुख्ता साधन न होने के कारण ये मजदूर ऑटो व मालवाहक वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हैं। वाहन चालक इन मजबूर श्रमिकों से प्रति सप्ताह 500 से 700 रुपए तक का मोटा किराया तो वसूल रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर उन्हें सिर्फ मौत का जोखिम मिल रहा है। यह एक दिन की बात नहीं रोजाना की स्थिति है। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है।

चार गुना ज्यादा लोड, न फिटनेस न बीमा

गुरुवार की सुबह जब जमीनी हकीकत देखी गई, तो तस्वीरें डराने वाली थीं। पुरानी बस्ती व कल्याणपुर मार्ग पर दौड़ रहे ऑटो में लगभग 20 सवारियां और मालवाहक में 35 से 40 मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपाय के बिठाया गया था। सबसे गंभीर बात यह है कि इस मार्ग पर दौड़ रहे अधिकांश कमर्शियल वाहनों के पास न तो परिवहन विभाग का फिटनेस सर्टिफिकेट है और न ही बीमा कराया गया है। ऐसे में यदि कोई बड़ा हादसा होता है, तो इन गरीब मजदूरों के जीवन की जवाबदेही तय करने वाला कोई नहीं है।
इनका कहना है
मालवाहकों में अगर लापरवाही पूर्वक श्रमिकों को ढोया जा रहा है तो इस पर कार्रवाई की जाएगी, इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कल ही टीम को भेजा जाएगा।
संजय जायसवाल, यातायात प्रभारी

Published on:
19 Jun 2026 12:02 pm