30 गांवों में बनेंगे 10-10 बीघा के चारागाह

कृषि विभाग की चारागाह विकास योजना के तहत एलआरएलएम ने चिह्नित किए 30 गांव, रौपेंगे विशेष प्रकार की घास

less than 1 minute read
Jul 02, 2017
cattels
श्योपुर.
गांवों में पशुपालन को बढ़ावा देने और पशुपालकों को सहज रूप से पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने को जिले के 30 गांवों में चारागाह विकसित किए जाएंगे। कृषि विभाग की चारागाह विकास योजना को धरातल पर उतारने का जिम्मा एनआरएलएम को दिया गया है, जो आगामी 15 जुलाई को एक विशेष अभियान के तहत चिन्हित गांवों के चारागाहों में घास की रोपणी करेगा। इसके लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही है।




बताया गया है कि एनआरएलएम द्वारा चिह्नित इन 30 गांवों में 10-10 बीघा के क्षेत्र को चारागाह में विकसित किया जाएगा और विशेष प्रजाति की घास लगाई जाएगी। इन चारागाहों में ग्राम संगठन की समूह की महिलाओं को इन चारागाहों में निर्धारित क्षेत्र, निर्धारित अवधि के लिए दिया जाएगा, जिसमें से वे महिलाएं चारा काटेगी और अपने पशुओं को तो खिलाएंगी, साथ ही अन्य पशुपालकों को बेच भी सकेंगी। विशेष बात यह है कि चारागाहों को सुरक्षित करने के लिए मनरेगा के तहत पत्थरों की कच्ची बाउंउ्रीवाल भी बनाई जाएगी, जिस पर लगभग चार लाख रुपए की लागत आएगी। बताया गया है कि चिन्हित 30 गांवों में चारागाह विकास के लिए 10-10 बीघा भूमि भी आवंटित हो गई है और चारागाह बनाने की प्रक्रिया की जा रही है।





इन प्रजातियों की लगेगी घास

गांवों मेें विकसित किए जा रहे चारागाहों में हाईब्रिड प्रजाति की घास लगाई जाएगी, जो चेन्नई से मंगाई जा रही है। इनमें नैपियर, दीनानाथ, गिनी, हेमेटास्टाइलो, चरी, हरा सोना आदि प्रजातियों की घास शामिल है। बताया गया है कि एक बार लगाने के बाद ये घास कई वर्षों तक चारा देती रहती है। साथ ही पशुओं को ये घास खिलाने के बाद अन्य पशु आहारों की आवश्यकता भी नहीं रहती है, क्योंकि ये घास काफी पौष्टिक होती है।


Published on:
02 Jul 2017 03:28 pm
Also Read
View All