भाजपा के सामने अपनी प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती है तो वहीं विपक्षी दलों के सामने नेताओं की दावेदारी बड़ी परेशानी का सबब बनने वाली है ।
सिद्धार्थनगर. लोकसभा चुनाव में भले ही अभी साल भर का वक्त बचा है, मगर यूपी में राजनीति चुनाव को लेकर गर्म है। सभी राजनीतिक दलों के उम्मीदवार अपनी अपनी टिकट की दावेदारी करते हुए क्षेत्र में सक्रिय हो गये हैं । भाजपा के सामने अधिकतर सीटों पर अपनी प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती है तो वहीं विपक्षी दलों के सामने नेताओं की दावेदारी बड़ी परेशानी का सबब बनने वाली है ।
2014 के लोकसभा चुनाव में सपा, बसपा और कांग्रेस ने अलग- अलग चुनाव लड़ा था और यूपी की 80 सीटों में से 72 सीटों पर भाजपा गठबंधन ने जीत हासिल की थी। वहीं 2019 के चुनाव का समीकरण पूरी तरह बदल गया है । उपचुनाव में मिली जीत के बाद यूपी में महागठबंधन कर विपक्षी दलों की चुनाव लड़ने की तैयारी है, ऐसे में कौन सी सीट किस पार्टी को जायेगा इसको लेकर उलझन की स्थिति है, मगर संभावित उम्मीदवार अपनी- अपनी सीटों पर दावेदारी करना शुरू कर दिये है।
डुमरियागंज लोकसभा सीट पर होगा दिलचस्प मुकाबला
सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज लोकसभा सीट पर मुकाबला इस बार दिलचस्प होता नजर आ रहा है। इस सीट से भाजपा के जगदंबिका पाल वर्तमान सांसद हैं, मगर उनकी उम्मीदवारी भी फाइनल नहीं दिख रही है। इस सीट पर भाजपा के कई नेता अपना दावा ठोंक रहे हैं। वहीं इसके विपरित महागठबंधन में इस सीट को लेकर ज्यादा मारामारी है। बसपा के संभावित प्रत्याशी आफताब आलम ने तो यहां अपना दावा पेश करते हुए जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है और वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करने में जुट गये हैं। वहीं सपा के कई दावेदार भी अपना दावा जता रहे हैं, जिनमें आलोक तिवारी और पूर्व विधायक विजय पासवान और पार्टी के दिग्गज नेता माता प्रसाद पांडेय भी शामिल हैं।
कांग्रेस की दावेदारी से बढ़ेगी मुश्किल
डुमरियागंज लोकसभा सीट पर महागठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस की है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस इस सीट से राहुल गांधी के पसंदीदा नेता मो. मुकीम की दावेदारी कर सकती है। मो. मुकीम ने पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट से बसपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और वह दूसरे नंबर पर रहे थे और उन्हें करीब- करीब दो लाख वोट मिले थे ।
वहीं इस सीट से पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ. अयूब की दावेदारी भी महागठबंधन के लिये बड़ी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि महागठबंधन इस चुनौतियों से कैसे पार निकलती है ।