शिकायत के बाद भी सुधार नहीं, राजस्व अधिकारियों के चक्कर काट रहे किसान
सीधी। रामपुर नैकिन तहसील के धनिगवां गांव में करीब एक सैकड़ा किसानों की जमीन राजस्व रिकार्ड में सरकारी दर्ज कर दी गई हैं। किसान शिकायत लेकर एसडीएम व तहसीलदार कार्यालय के चक्कर लगा रह हैं, लेकिन एक साल बाद भी सुधार नहीं किया गया, बल्कि उनसे सुविधा शुल्क की मांग की जा रही है। आदिवासी परिवार के ये किसान सुविधा शुल्क देने में अक्षम हैं। रामपुर नैकिन जनपद की बोकरो पंचायत का धनिगवां गांव आदिवासी बाहुल्य है।
यहां करीब 700 आबादी है। इनमें से 350 मतदाता हैं। 90 पट्टेदार हैं, जिसमें से करीब 95 फीसदी किसानों की भूमि मप्र शासन दर्ज कर दिया गया है। पीडि़त किसान बताते हैं कि जब हम राजस्व रिकार्ड में सुधार के लिए तहसील कार्यालय जाते हैं तो नायब तहसीलदार हनुमानगढ़ के कार्यालय में पदस्थ लिपिक केके तिवारी (जो बोकारो पंचायत का निवासी है।) अपमानजनक बातें करता है। रिकॉर्ड ठीक करने के बदले सुविधा शुल्क मांगता है।
किसानों में आक्रोश
बताया गया कि कंप्यूटर की गलत प्रविष्ट में सुधार एवं लिपिक केके तिवारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए बड़ी संख्या में किसान गत 25 जनवरी को एसडीएम अर्पित वर्मा से मिले थे। तब उन्होंने एक माह में कार्रवाई का वादा किया था, लेकिन पांच माह बीत गए, इस मामले में एसडीएम ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिसे लेकर धनिगवां गांव के किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
इस मामले से चुरहट एसडीएम अर्पित वर्मा को जनवरी में अवगत कराया था। उन्होंने आश्वासन भी दिया था कि एक महीने में रिकॉर्ड दुरुस्त करा दिए जाएंगे, लेकिन आज तक सुधार नहीं किया गया। इसलिए अब कलेक्टर को पत्र लिखकर रिकॉर्ड में सुधार कराने की मांग की है।
उमेश तिवारी, संयोजक, टोंको,रोको,ठोकों क्रांतिकारी मोर्चा
जनवरी में मामला संज्ञान में आया था, लेकिन मैं अवकाश में था। वापस आने पर ध्यान से उतर गया था, हालांकि जिस लिपिक पर किसानों का आरोप है, उसे मैंने हटा दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्व रिकॉर्ड में सुधार कराएंगे।
अर्पित वर्मा, एसडीएम, चुरहट