एक सच्चाई यह भी: जिले में एक तिहाई से अधिक वर्दी वाले अब भी सीसीटीएनएस अर्थात क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम से अंजान हैं।
सीधी। जिले में एक तिहाई से अधिक वर्दी वाले अब भी सीसीटीएनएस अर्थात क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम से अंजान हैं। कारण, यह है कि तीन साल से चल रहा प्रशिक्षण अब तक पूरा नहीं हो सका। इसका खामियाजा उन जवानों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने प्रशिक्षण ले लिया है।
आलम यह है कि थानों में एफआईआर से लेकर बयान दर्ज करने और मौका नक्शा बनाने तक के लिए विवेचना अधिकारी इनका इंतजार करते रहते हैं। उनके पहुंचते ही अपना काम पहले कराने के लिए खींचतान शुरू हो जाती है।
जानकारी के अनुसार, सभी थानों में औसतन चार ऐसे जवान हैं जिनकी सीसीटीएनएस में कमांड है। सभी की तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाती है। तीन-तीन सुबह से शाम और दो रात को थाने में काम करते हैं। थाना प्रभारी से लेकर हवलदार तक जो काम कागजों में करते हैं, उन्हें सिस्टम में उतारना इनका काम रहता है।
कई थानों में सीसीटीएनएस के जानकार जवानों की संख्या कम है। ऐसे में यदि ये अवकाश पर चले जाएं तो शिकायतकर्ता को तत्काल एफआईआर नहीं मिल पाती। कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें शिकायतकर्ताओं ने एफआईआर की कॉपी न मिलने का आरोप लगाया है।
इन थानों में सात-सात कम्प्यूटर
सीसीटीएनएस की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा जिले के बड़े थानों में सात-सात कम्प्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि आपराधिक दृष्टि से छोटे थानों में पांच-पांच कम्प्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं। इसमें सिटी कोतवाली, रामपुर नैकिन, चुरहट थाना में सात-सात कम्प्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं। अन्य थानों में कम्प्यूटर की संख्या पांच-पांच है।
यहां नेटवर्क ही नहीं
जिले के भुईमाड़ थाना में किसी भी कंपनी का मोबाइल टॉवर नहीं लगा है। इससे थाना परिसर में न तो फोन लगता और न ही नेटवर्क काम करता। जबकि बिना नेटवर्क के सीसीटीएनएस सिस्टम संचालित करना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में भुईमाड़ थाना में सीसीटीएनएस का कोई कार्य नहीं हो पा रहा है।
सीसीटीएनएस और थाने के सिस्टम
- 03 थानों में सात-सात कंप्यूटर
- 07 थानों में पांच-पांच कंप्यूटर
- 2014 अक्टूवर से चल रहा प्रशिक्षण
- 04 जवान प्रत्येक थाने में प्रशिक्षित
- 600 का जिले में कुल बल
- 430 अब तक प्रशिक्षित
- 10 जवान प्रति बैच की संख्या
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