दूसरे दिन भी जारी रहा खुलेआम नकल का खेल, बैरंग लौटा दस्ता
सीधी। भोज मुक्त विवि की परीक्षा में खुलेआम नकल का खुलासा करने के बाद कलेक्टर द्वारा गठित उडऩदस्ता दल मंगलवार को धुम्मा स्थित परीक्षा केन्द्र पहुंचा, लेकिन उसे वहां एक भी नकलची छात्र नहीं मिले। लिहाजा, बिना कार्रवाई के लौटना पड़ा। दरअसल, दल के पहुंचने से पहले ही जानकारी लीक हो गई थी। मंगलवार सुबह प्रथम पाली की परीक्षा जारी थी।
तभी उडऩदस्ता टीम विद्यालय पहुंची, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने छात्र-छात्राओं को पहले ही सतर्क कर दिया था। जिस कारण टीम एक भी नकल प्रकरण नहीं तैयार कर पाई। उडऩदस्ता टीम के वापस लौटते ही फिर खुल्लम-खुल्ला नकल का खेल शुरू हो गया। दूसरी पाली दोपहर तीन बजे से शाम ६ बजे तक की परीक्षा में भी खुलेआम नकल होती रही।
नकल रोक पाने में नाकाम साबित
कलेक्टर ने इसके लिए पैनल गठित किया था, लेकिन वह नकल रोक पाने में नाकाम साबित हो रहा है। सूत्रों की मानें तो प्रति परीक्षा केंद्र के हिसाब से पैनल का सुविधा शुल्क निर्धारित है, जो परीक्षा केंद्र मे पहुंचते हैं और सुविधा शुल्क लेकर वापस लौट जाते हैं। परीक्षा केंद्रो के अंदर जहां परीक्षार्थी खुलेआम किताबों व अन्य नकल सामग्री के सहयोग से उत्तर पुस्तिका लिख रहे हैं वहीं परीक्षा केंद्रो के बाहर भी नकल सामग्री पहुंचाने वालों का हुजूम लगा रहता है। भोज में चल रही खुले आम नकल जिला प्रशासन को खुली चुनौती मानी जा रही है।
आधे घंटे रुकी नकल
पत्रिका द्वारा मंगलवार को प्रकाशित खबर को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने मंगलवार सुबह उडऩदस्ता दल को मौके पर भेजा, लेकिन स्कूल प्रबंधक को पहले से ही जानकारी हो पाने पर करीब आधा घंटे के लिए नकल पर रोक लगा दी गई, जिससे उडऩदस्ता टीम को एक भी नकल प्रकरण नहीं नसीब हुए, टीम के लौटते ही पुन: नकल का सिलसिला शुरू कर दिया गया। वहीं दूसरी पाली की परीक्षा तीन से छह बजे तक नकल का सिलसिला चलता रहा।
बेरोजगारों को मौका
भोजमुक्त परीक्षा मे पढ़े-लिखे बेरोजगारों को रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। जहां नकल कराने के लिए चुटका छांटने व कॉपी लिखने के भी अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सूत्रों की बात माने तो चुटका छांटने वाले को दो सौ रूपए व परीक्षा की कांपी लिखने वाले को एक पेपर के बदले पांच सौ रूपए दिए जा रहे हैं। इस तरह की नकल कर डिग्री हांसिल करने वाले युवाओं का भविष्य क्या होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
परिजन हल कर रहे प्रश्न-पत्र
बता दें कि, भोज मुक्त विवि की स्नातक परीक्षाओं में खुलेआम नकल जारी है। सेमरिया के बाद धुम्मा केंद्र में भी सामूहिक नकल का वीडियो वायरल हुआ है, बावजूद इसके अधिकारी मौन हैं। जबकि, कलेक्टर दिलीप कुमार ने इसके लिए उडऩदस्ता दल गठित किया है, जिसे लगातार निगरानी करनी है। लेकिन जानबूझकर वे दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। अनदेखी का आलम ये है कि परीक्षा केंद्र के बाहर भी नकल सामग्री पहुंचाने वालों का हुजूम लगा रहता है।
वसूली सुविधा शुल्क
भोज परीक्षा में नकल तो आम बात है। लेकिन इसके लिए वसूली का खेल नया है। सोमवार को बीएससी द्वितीय वर्ष की वनस्पति विज्ञान की परीक्षा थी। धुम्मा सेंटर में शामिल कई छात्रों ने बताया, परीक्षा के पूर्व में ही छात्रों से तीन हजार से लेकर पांच हजार तक नकल कराने के नाम पर वसूली की गई है। वहीं बताया गया कि जिस परिक्षार्थी ने दस हजार रुपए दे दिए उसे परीक्षा देने आने की जरूरत ही नहीं पड़ती उसकी कापी प्रिंसिपल के कार्यालय में ही लिख जाती है। बाहर आ जाते हैं प्रश्र-पत्र: केंद्र में जैसे ही प्रश्रपत्र का वितरण हुआ वैसे ही प्रश्न-पत्र केंद्र से बाहर पहुंचा दिए गए। इसके लिए खिड़कियों पर तैनात परीक्षार्थियों के परिजनों को बेसब्री से इंतजार रहता है। परिजन प्रश्न-पत्र पाते ही चुटका बनाकर परीक्षार्थियों तक पहुंचाने में जुट जाते हैं।