सीकर

लोकसभा चुनाव में हार पर छलका बीजेपी नेता सुमेधानंद सरस्वती का दर्द, वसुंधरा राजे को लेकर कही ऐसी बड़ी बात

Rajasthan Politics: राहुल कास्वां को लेकर पूछ गए एक सवाल पर उन्होंने कहा कि बीजेपी की सीटें कम होने के पीछे कास्वां का टिकट कटना भी कारण रहा है

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Jun 22, 2024

Rajasthan Politics: लोकसभा चुनाव में हार के बाद सीकर लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी प्रत्याशी रहे सुमेधानंद सरस्वती का बड़ा बयान सामने आया है। वसुंधरा राजे को लेकर उन्होंने कहा कि वे बड़ी लीडर हैं। पता नहीं क्यों वे चुनाव में कहीं नजर नहीं आईं, अगर वो प्रचार के लिए आतीं तो सीटों पर बड़ा फायदा मिलता। वो चुनावों में क्यों नजर नहीं आईं, इसका कारण मुझे नहीं पता, लेकिन उनके आने से फायदा जरूर होता। बता दें कि लोकसभा चुनाव में सीकर से भाजपा के टिकट पर सुमेधानंद तीसरी बार चुनाव लड़े। लगातार दो बार जीत के बाद उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

योजनाओं का प्रचार नहीं कर पाएः सुमेधानंद

उन्होंने आगे कहा कि हम अपनी ही योजनाओं का अच्छे से प्रचार-प्रसार नहीं कर पाए। जब मैं सांसद बना तो दिल्ली तक एक ही ट्रेन थी। जयपुर भी एक ट्रेन दो चक्कर लगाती थी, अब 52 ट्रेनें चल रहीं हैं। हम लोगों तक अपनी योजनाओं का प्रचार नहीं कर पाए। अग्निवीर योजना को लेकर उन्होंने कहा कि अगर इस स्कीम में पहले ही कुछ संशोधन किए जाते तो लाभ मिलता, लेकिन आगे भी चुनाव होने हैं। पार्टी अगर योजना में कुछ बदलाव करती है, जो कि युवाओं के हित में हो तो पार्टी को फायदा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और आरएलपी सहित कम्युनिस्टों ने अग्निवीर के खिलाफ माहौल बनाया।

कांग्रेस ने जनता में भ्रम फैलाया

राहुल कास्वां को लेकर पूछ गए एक सवाल पर सुमेधानंद सरस्वती ने कहा कि बीजेपी की सीटें कम होने के पीछे कास्वां का टिकट कटना भी कारण रहा है। उन्होंने कहा कि कास्वां का टिकट कटने के कारण चूरू, सीकर, झुंझुनूं और नागौर सीट पर असर पड़ा है। इसे नकारा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव में कांग्रेस ने आरक्षण और संविधान खतरे का एक संदेश फैला दिया, जिसे हमारी पार्टी समय रहते मैनेज नहीं कर पाई। हमारी टीम लोगों को समझा नहीं सकी कि आरक्षण और संविधान को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। किसान आंदोलन का भी थोड़ा असर रहा। यहां से कुछ ही कॉमरेड आंदोलन में गए थे। जाट बोर्डिंग के बयान पर उनका कहना था कि ये सिर्फ कॉमरेडों ने झूठा प्रचार किया है। मैं जाटों का काफी सम्मान करता हूं, इसलिए इसका कोई ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा।

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