सरकार एक तरफ तो कुपोषण मुक्त स्वस्थ प्रदेश के सपने दिखा रही है। दूसरी तरफ पौष्टिकता के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
सीकर.
सरकार एक तरफ तो कुपोषण मुक्त स्वस्थ प्रदेश के सपने दिखा रही है। दूसरी तरफ पौष्टिकता के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। हकीकत यह है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों को गर्म पौष्टिक आहार देने के लिए सिर्फ साढ़े तीन रुपए का बजट दिया जा रहा है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि महज साढ़े तीन रुपए में किस प्रकार का पौष्टिक खाना बच्चों को परोसा जा रहा होगा।
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जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह साल तक के बच्चों को गर्म पोषहार दिया जाता है। जिसके तहत प्रत्येक बच्चे को दलिया व खिचड़ी पकाकर खिलाई जाती है। मीन्यू के हिसाब से इनमें गुड़, चीनी, तेल, छिलके की दाल, मूंग की दाल **** कई पौष्टिक तत्व डालने होते हैं। यह गर्म पोषाहार स्वयं सहायता समूह ही तैयार कर आंगनबाड़ी केंद्र पर पहुंचाते हैं।
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बदले में स्वयं सहायता समूह को एक बच्चे पर महिला एवं बाल विकास विभाग केवल साढ़े तीन रुपए का भुगतान होता है। जबकि समूह चलाने वाली कई महिलाओं का कहना है कि साढ़े तीन रुपए में तो एक नमक की थैली भी नहीं आती है। ऐसे में इतने कम पैसों में पौष्टिक आहार की थाली बच्चों के लिए तैयार करना संभव नहीं है। लेकिन, फिर भी कम मात्रा में सामग्री डालकर काम चलाना पड़ रहा है। बजट बढ़ाने के लिए कई बार विभाग के अधिकारियों को कहा जा चुका है। लेकिन, वे व्यवस्था आगे से संचालित होने का हवाला देकर मामले को हर बार टाल देते हैं।