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जया किशोरी और सोनू सूद को अवॉर्ड देने वाला मनीष निकला ‘फर्जी डिग्री’ का किंगपिन, सेलिब्रिटी कनेक्शन ने उड़ाए होश

Kanpur Fake Degree Gang: कानपुर के फर्जीवाड़े केस में राजस्थान के सीकर का मास्टरमाइंड डॉ. मनीष कुमार गिरफ्तार। सोनू सूद और हिना खान जैसी हस्तियों संग फोटो खिंचवाने वाला आरोपी कैसे चला रहा था नकली मार्कशीट का ग्लोबल सिंडिकेट? पढ़ें पूरी खबर...
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कानपुर

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Pratiksha Gupta

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Updated: 19 May 2026, 1:06 PM IST

Kanpur fake degree gang, fake marksheet racket Kanpur

जया किशोरी को अवार्ड देता आरोपी मनीष कुमार | फोटो सोर्स- X(@askshivanisahu)

Kanpur Fake Degree Gang: कानपुर पुलिस ने फर्जी मार्कशीट और नकली डिग्री बेचने वाले एक बहुत बड़े गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस गैंग के मुख्य आरोपी डॉ. मनीष कुमार और उसके साथी अर्जुन यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि देश भर में नकली डिग्री का यह काला धंधा चलाने वाला मनीष कुमार मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले का रहने वाला है। आरोपियों के कब्जे से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का एक संदिग्ध पत्र भी बरामद हुआ है।

BDS में फेल हुआ, फिर खुद बन गया 'फर्जी डॉक्टर'

पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि राजस्थान के सीकर का रहने वाला मनीष कुमार सिर्फ इंटर पास है। वह राजस्थान से बिहार गया और फिर डेंटिस्ट की पढ़ाई करने बेंगलुरु चला गया, लेकिन वह परीक्षा में फेल हो गया। इसके बाद उसने चेन्नई की एक फर्जी संस्था से 'डॉक्टरेट' की नकली उपाधि ले ली और अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखवा लिया। साल 2019 में वह कानपुर के जालसाजों से मिला और घर बैठे नकली डिग्री बेचने का धंधा शुरू कर दिया।

जया किशोरी और सोनू सूद जैसी हस्तियों को बांटे अवॉर्ड

आरोपी मनीष खुद को समाज सेवक और बड़ा आदमी दिखाना चाहता था। इसके लिए उसने लंदन की एक फर्जी संस्था 'ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस' के नाम पर मुंबई, बेंगलुरु और गोवा में बड़े-बड़े इवेंट्स करवाए। इन प्रोग्राम्स में उसने बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद, टीवी एक्ट्रेस हिना खान, एक्टर करन मेहरा और कथावाचक जया किशोरी समेत करीब 60 बड़ी हस्तियों को अवॉर्ड दिए। वह इन सेलिब्रिटीज के साथ अपनी तस्वीरें दिखाकर लोगों पर धौंस जमाता था ताकि किसी को उस पर शक न हो। वह दुबई में भी ऐसा ही एक बड़ा इवेंट प्लान कर रहा था, लेकिन फंडिंग न मिलने के कारण वह टल गया।

15 हजार में मिल जाती थी हाईस्कूल से लेकर इंजीनियरिंग की डिग्री

मनीष अब तक 65 से 70 से ज्यादा फर्जी मार्कशीट और प्रोफेशनल डिग्रियां खुद तैयार करवा चुका है। यह गिरोह देश की बड़ी- बड़ी यूनिवर्सिटीज जैसे- कुमाऊं यूनिवर्सिटी, गढ़वाल यूनिवर्सिटी, तेलंगाना यूनिवर्सिटी और फरीदाबाद की लिंग्या यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जी बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा और एलएलबी की डिग्रियां व माइग्रेशन सर्टिफिकेट बांट रहा था। आरोपी मनीष को हर एक फर्जी डिग्री मुहैया कराने के बदले 15 हजार रुपये मिलते थे।

दुबई भागा, फिर पुलिस ने जाल बिछाकर पकड़ा

इस साल 18 फरवरी को जब कानपुर पुलिस ने इस गैंग के ठिकाने पर छापा मारा था, तब वहां से 1000 से ज्यादा नकली डिग्रियां मिली थीं। उस समय मनीष दुबई भाग गया था। मार्च में जब वह भारत लौटा, तो पुलिस से बचने के लिए वह गोवा, पुणे, बेंगलुरु और दिल्ली में छिपता रहा। आखिरकार, कानपुर पुलिस ने घेराबंदी करके उसे धर दबोचा। आखिरकार, SIT ने जाल बिछाकर उसे यशोदा नगर के शनिदेव चौराहा के पास से गिरफ्तार कर लिया।

अकाउंट्स में लाखों का ट्रांजेक्शन, ऑनलाइन दिखती थी डिग्री

जांच में सामने आया है कि मनीष और इस गिरोह के मास्टरमाइंड शैलेंद्र ओझा के खातों में 16.44 लाख रुपये का लेन-देन हुआ है। वहीं गिरफ्तार किया गया दूसरा आरोपी अर्जुन यादव उसने भी मनीष के खाते में करीब 20 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। मनीष ने पूछताछ में कुबूल किया कि वह इंदौर के एक प्रिंटिंग प्रेस से ये डिग्रियां छपवाता था। संजय ने एक ऐसी फर्जी वेबसाइट भी बना रखी थी, जहां ये नकली डिग्रियां ऑनलाइन वेरिफाई हो जाती थीं।

स्पेशल बच्चों के नाम पर भी अर्जुन कर रहा था धोखाधड़ी

गिरफ्तार दूसरा आरोपी अर्जुन यादव कानपुर के 5 अलग-अलग इंस्टीट्यूट्स में स्पेशल बच्चों के लिए मॉरीशस की कंपनी 'लर्निंग पाथ्स' और मनीष की कंपनी 'अल्मा किड्स' की फ्रेंचाइजी चला रहा था। ये कंपनियां बंद होने के बावजूद अर्जुन फर्जी शिक्षकों के सहारे अवैध रूप से क्लासेस चलाकर मोटी कमाई कर रहा था।