सीकर. मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध जिला मुख्यालय का सबसे बडा जनाना अस्पताल होने के बावजूद नेटवर्क तो कभी प्रिंटर नहीं जैसे बहाने बनाए जा रहे हैं। जिले के अन्य अस्पतालों में प्रसूताओं का लेबर रूम में ऑनलाइन रेकार्ड रखा जा रहा है जबकि जनाना अस्पताल में लापरवाही बरती जा रही है।
सीकर. मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध जिला मुख्यालय का सबसे बडा जनाना अस्पताल होने के बावजूद नेटवर्क तो कभी प्रिंटर नहीं जैसे बहाने बनाए जा रहे हैं। जिले के अन्य अस्पतालों में प्रसूताओं का लेबर रूम में ऑनलाइन रेकार्ड रखा जा रहा है जबकि जनाना अस्पताल में लापरवाही बरती जा रही है। अस्पताल में प्रसूताओं का रिकॉर्ड समय पर अपलोड नहीं किया जा रहा है। इस पर निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर ने संबंधित अधिकारियों और स्टाफ को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि अस्पताल में रेकार्ड रखने के लिए पांच टेबलेट डिवाइस दी हुई इसके बावजूद रेकार्ड नहीं रखना बेहद गलत है। डिजीटल रिकॉर्ड से ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी संभव है। उन्होंने चेताया कि लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिले में प्रसूताओं में आयरन की कमी दूर करने के लिए एफसीएम के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं लेकिन उसको लेकर भी अस्पताल प्रबंधन गंभीर नहीं है। अस्पताल में पिछले माह के दौरान महज 178 एफसीएम इंजेक्शन लगाए गए हैं जबकि नीमकाथाना में 622 एफसीएम के इंजेक्शन लग पाए हैं। आगामी दिनों में एचपीवी वेक्सीनेशन शुरू होना है लेकिन इसके बावजूद प्रिंटर नहीं होने का हवाला देना सोचनीय विषय है। अस्पताल का लक्ष्य प्रमाणीकरण तभी हो पाएगा जब छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा किया जाएगा। इस दौरान अतिरिक्त निदेशक आरसीएच डॉ योगेश्वर प्रसाद, जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ विशाल सिंह, अतिरिक्त जिला प्रभारी अधिकारी राष्ट्रीय बाल, किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम डॉ पवन शर्मा एवं जिला वैक्सीन प्रभारी नर्सिंग ऑफिसर रणजीत सिंह मौजूद रहे।
यहां भी किया निरीक्षण
निदेशक आरसीएच ने कल्याण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके अग्रवाल, जनाना अस्पताल के प्रभारी डॉ. राजेश मीणा, विभागाध्यक्ष शिशु रोग डॉ. हरीश पूनिया और विभागाध्यक्ष स्त्री एवं प्रसूति रोग डॉ. अल्का खन्ना के साथ लेबर रूम यूनिट में अविलंब प्रसव वॉच एप्लीकेशन के माध्यम से रिकॉर्ड रखने, प्रसूता के भर्ती के दौरान ही जेएसवाई और लाडो योजना के दस्तावेज प्राप्त कर अविलंब प्रसूता और नवजात बालिका को योजनाओं का लाभाविंत करने, गर्भवती एवं स्तनपान करवाने वाली एनीमिया ग्रसित माताओं में एफसीएम इंजेक्शन लगाने, उजाला क्लिनिक में किशोर किशोरियों की प्रभावी काउंसिलिंग और आवश्यक उपचार करने, टीकाकरण कक्ष में आगामी दिवसों में एचपीवी टीकाकरण के मद्देनजर कम्प्यूटर और प्रिंटर की व्यवस्था करने, थैलेसीमिया ग्रसित बच्चों के रक्त की व्यवस्था हेतु कुटुंब योजना में ब्लड बैंक, एनजीओ के माध्यम से जोड़ कर लाभान्वित करने के निर्देश दिए।
प्रत्येक प्रसव पर दो प्रतिशत मिलती है राशि
निदेशक आरसीएच ने कहा कि लेबर रूम में होने वाले प्रत्येक प्रसव का पूरा विवरण प्रसव वॉच एप्लीकेशन के जरिए ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। किसी भी स्तर पर बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। लेबर रूम का पूरा काम पेपरलेस होना चाहिए। नेहरू पार्क के जनाना अस्पताल में रोजाना औसतन डेढ दर्जन प्रसव होते हैं। जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को राज्य सरकार की ओर से राशि दी जाती है। इस राशि में से दो प्रतिशत राशि का भुगतान संबंधित अस्पताल को किया जाता है। जिसका उपयोग चिकित्सकीय सेवाओं में किया जाना चाहिए। हर माह इतनी बड़ी राशि मिलने के बावजूद अस्पताल में संसाधनों की कमी का हवाला देना शर्मनाक िस्थति है।
बकाया जमा करवाएं
जनाना अस्पताल में चल रहे आईवीएफ सेंटर को लेकर निदेशक ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकारी सम्पति होने के बावजूद निजी व्यक्ति की ओर से ताला नहीं लगाया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने आईवीएफ सेंटर को लेकर चल रहे विवाद के मामले में संबंधित स्टॉफ से बयान लिए। विवाद को लेकर दोनों पक्ष से चर्चा की। साथ ही कल्याण अस्पताल प्रबंधन को आईवीएफ सेंटर की बकाया राशि को जमा करवाने के बाद एनओसी देने के निर्देश दिए।