
सीकर. सैनिक स्कूल के नाम पर डेढ़ लाख रुपए तक फीस और मैस के लिए 40 हजार रुपए लेने के बावजूद बेटियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए अभिभावकों का गुस्सा रविवार को फूट पड़ा। मोहनपुरा स्थित महाराव शेखाजी बालिका सैनिक स्कूल के अभिभावक अपनी बेटियों को सामूहिक अवकाश पर ले गए। स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर अभिभावकों ने कहा कि बार-बार मांग के बावजूद पानी, बिजली, कूलर, लॉन्ड्री, खेल और बेहतर भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। स्कूल से बाहर आई छात्राओं ने भी अव्यवस्थाओं की शिकायत की। एक छात्रा ने बताया कि कई दिनों से पानी की समस्या है और कपड़े भी उन्हें खुद धोने पड़ते हैं। दूसरी छात्रा ने आरोप लगाया कि शनिवार को रोटी मांगने पर शिक्षिका ने रोटी देने के बजाय चावल से ही पेट भरने को कहा।
अभिभावकों ने 'सैनिक स्कूल गाइडलाइन लागू करो' के बैनर के साथ प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सैनिक स्कूल के नाम पर डेढ़ लाख रुपए तक फीस लेने के बावजूद स्कूल में आर्मी का कोई स्टाफ नहीं है। हिंदी माध्यम के शिक्षकों से आरबीएसई की पढ़ाई कराई जा रही है। मैस के लिए करीब 40 हजार रुपए लेने के बावजूद छात्राओं को अपेक्षित भोजन नहीं मिल रहा। अभिभावकों ने कहा कि बिजली कटौती, पानी और कूलर की समस्या के साथ लॉन्ड्री सुविधा भी नहीं है। छोटी छात्राओं को खुद कपड़े धोने पड़ रहे हैं। खेल सुविधाओं का भी अभाव है।
अभिभावक कृष्णपाल सिंह भाकर ने बताया कि सैनिक स्कूल की एसओपी जारी करने, सीबीएसई व सैनिक स्कूल सोसायटी के अधीन संचालन, सैनिक स्कूल के अनुरूप शिक्षण व प्रशासनिक व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा और एनसीसी लागू करने सहित 20 सूत्री मांगों को लेकर प्रधानाचार्य से मुख्यमंत्री तक शिकायत की जा चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि पांच सितंबर तक मांगें नहीं मानी गईं तो जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना दिया जाएगा।
अभिभावक बेटियों के सामूहिक अवकाश पर रहने संबंधी ज्ञापन भी लेकर पहुंचे थे। उनका कहना है कि सूचना देने के बावजूद शिक्षा अधिकारी और प्रधानाचार्य ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे। अब ज्ञापन डाक के जरिए भेजा जाएगा। अभिभावकों ने मांगें पूरी होने तक बेटियों को स्कूल नहीं भेजने की बात कही।
सैनिक स्कूल की छात्राओं को रक्षाबंधन पर्व के लिए व्यक्तिगत आवेदन के आधार पर अवकाश दिया गया है। स्कूल की व्यवस्थाओं में भी तेजी से सुधार किया जा रहा है। विभाग अभिभावकों की जायज मांगें जल्द ही पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- विक्रम सिंह शेखावत, एडीईओ (माध्यमिक), सीकर