सीकर. केन्द्र सरकार की ओर से एक साल पहले सरकारी अस्पतालों में लागू किया गया इंटीग्रेटेडेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम (एचएमएस) अधिकांश अस्पतालों में कागजों में चल रहा है। वजह सरकार ने अस्पतालों में मरीजों की जांच, दवा वितरण और इलाज की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने के आदेश तो लागू कर दिए लेकिन इसके लिए अस्पतालों में संसाधन नहीं दिए हैं।
सीकर. केन्द्र सरकार की ओर से एक साल पहले सरकारी अस्पतालों में लागू किया गया इंटीग्रेटेडेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम (एचएमएस) अधिकांश अस्पतालों में कागजों में चल रहा है। वजह सरकार ने अस्पतालों में मरीजों की जांच, दवा वितरण और इलाज की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने के आदेश तो लागू कर दिए लेकिन इसके लिए अस्पतालों में संसाधन नहीं दिए हैं। जिसका नतीजा है कि जिले के कई सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर यह सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। जिससे डिजीटल सिस्टम दवा केन्द्र और लेबोरेट्री तक ही सिमट कर रहा गया है। रही सही कसर ग्रामीण अंचल में इंटरनेट की सुविधा नहीं मिल पाने से हो गई है। मरीजों को अब भी अस्पतालों में दवाओं की पर्ची ले जाकर उपचार करवाना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अस्पतालों में पर्याप्त स्टॉफ, तकनीकी संसाधन और नियमित मॉनिटरिंग नहीं होगी, तब तक आई एचएमएस केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा। विभाग को चाहिए कि सिस्टम के उपयोग की सख्त समीक्षा करे और लापरवाह संस्थानों पर कार्रवाई सुनिश्चित करे। हालांकि इसको लेकर नेशनल हेल्थ मिशन ने निदेशक ने सीकर, चूरू, झुंझुनूं सहित प्रदेश के 19 जिलों के स्वास्थ्य विभाग को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था।
आईएचएमएस को लागू हुए करीब एक साल होने जा रहा है, लेकिन अब तक मरीजों को इससे अपेक्षित सुविधा नहीं मिल सकी है। ग्रामीण अंचल के मरीजों अब तक जांच रिपोर्ट पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध हो रही हैं और न ही दवाओं का स्टॉक रियल टाइम अपडेट हो पा रहा है। इसको लेकर जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय प्रबंधन को कई बार जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में आईएचएमएस को लागू करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार कई अस्पतालों में लॉगिन आईडी तो बनी है, पर रोजाना की एंट्री नियमित नहीं हो रही।
सरकारी अस्पतालों में ओपीडी के आंकड़ों में हेरफेर और निशुल्क दवाओं के वितरण में गडबडी करने की शिकायतों के बाद केन्द्र सरकार ने यह सिस्टम लागू किया था। नए सिस्टम के अनुसार ओपीडी में आने वाले मरीज की जांच, दवा और परामर्श का रेकार्ड ऑनलाइन करना था। इससे उच्चाधिकारियों को रियल टाइम डेटा महज एक क्लिक पर मिल जाए और अव्यवस्थाओं से बचा जा सके। इसके बाद भी फिलहाल मरीजों को दोहरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है मरीजों को पहले काउंटर पर पर्ची बनवाना और फिर दवा खिड़की पर अलग से रजिस्टर में नाम दर्ज कराना। इससे समय भी ज्यादा लग रहा है और अस्पतालों में भीड़ भी बढ़ रही है।
सरकारी और निजी अस्पतालों में जाने पर मरीज के जाने पर आईएचएमएस पोर्टल पर नम्बर, नाम डिटेल लिखते ही उसकी पूरी जानकारी कम्यूटर स्क्रीन पर नजर आनी थी। साथ ही उपचार करने वाले चिकित्सक को मरीज के उपचार, एलर्जी और लक्षणों के बारे में जानकारी मिलने से सटीक इलाज हो सके इस उद्देश्य के साथ यह सिस्टम लागू किया गया था।
सरकारी अस्पताल में इंटीग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने के लिए निर्देश दिए हुए हैं। यह सिस्टम लागू करवाने के लिए संबंधित ब्लॉक के अधिकारियों की जिम्मेदारी दी हुई है। जानकारी ली जाएगी जहां ये सिस्टम लागू नहीं है उनको पाबंद किया जाएगा।
डॉ. अशोक महरिया, सीएमएचओ सीकर