खबर का असर: कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना से श्रीमाधोपुर को जोड़ने का मामला
कुम्भाराम लिफ्ट पेयजल परियोजना में देरी को लेकर अब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग दिल्ली भी सख्त हो गया है। इस मामले में एनएचआरसी ने नौ दिसम्बर तक मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव जलदाय विभाग व जिला कलक्टर सीकर से रिपोर्ट मांगी है।
पत्रिका ने मामले को किया उजागर
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने सोमवार के अंक में इस मुद्दे को प्रकाशित किया था। इससे पहले भी पत्रिका की ओर से इस मुद्दे पर बरती जा रही लापरवाही को भी उजागर किया था। इस मामले में उप सचिव, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने अपने पत्र द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है।
8798 करोड़ रूपए की परियोजना
कुम्भाराम लिफ्ट परियोजना लगभग 8798 करोड़ रुपए की एक बड़ी परियोजना है। जिसमें सीकर और झुंझुनू जिले के 864 गांव, सीकर जिले के 13 कस्बे, 269 गांव और झुंझुनूं जिले के 5 कस्बे शामिल है। कई वर्ष पहले प्रोजेक्ट की योजना बनी थी। लेकिन मामला अटका हुआ है, इस कारण श्रीमाधोपुर के लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। इस मामले में रिपोर्ट पेस नहीं करने पर अब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने सचिव, जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार के रवैये को लेकर भी नाराजगी जताई है वह रिपोर्ट तलब की है।
नौ दिसंबर तक का मिला समय
इस मामले में आयोग ने चार सप्ताह के भीतर नौ दिसंबर तक राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, जिला कलेक्टर सीकर से रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने लिखा कि गंभीरता नहीं बरतने पर मजबूरन समन जारी करना पड़ेगा। साथ ही सचिव, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के पूर्वोक्त परियोजना में सुविधा प्रदान करने और इस अवधि के भीतर की गई कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा जाता है।