
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री और दंडी स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने राजस्थान के सीकर प्रवास के दौरान 'पत्रिका' के साथ विशेष बातचीत में देश के मौजूदा सामाजिक, राजनीतिक और वैश्विक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान शीर्ष नेताओं के प्रति इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ऐसी बयानबाजी करने वाले देश की 'जेन-जी' का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि वे केवल मानसिक और लैंगिक हताशा के शिकार हैं।
इसके साथ ही उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मनुस्मृति और अंबेडकरवाद पर खुले मंच से सभी धर्मों के ग्रंथों का तुलनात्मक विमर्श कराने की सीधी चुनौती दी है।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने देश की युवा पीढ़ी का बचाव करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर नेताओं को गंदी गालियां देने वाले अराजक तत्व भारत के युवाओं की पहचान नहीं बन सकते। हमारे वास्तविक 'जेन-जी' वे युवा हैं जो अपने आराध्य के लिए हरिद्वार से 15 दिनों में 4.80 करोड़ कांवड़ लेकर यात्रा करते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का समाज समलैंगिक और अनैतिक संबंधों पर आधारित नहीं है। जंतर-मंतर पर जो कुछ देखा गया, वह केवल सामाजिक आचरण का पतन और व्यक्तिगत फ्रस्ट्रेशन था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध मुक्त करने के संदर्भ में बोलते हुए संत समिति के महामंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के उच्च पदों पर कई बार चारित्रिक रूप से कमजोर या भ्रष्ट व्यक्ति पहुंच जाते हैं, जो अपनी निजी हताशा से बचने के लिए ऐसे फैसलों की व्याख्या करते हैं।
उन्होंने कहा कि कोई भी देश, परिवार और समाज संविधान या कानून की किताबी धाराओं से पहले नैतिक मूल्यों के बंधन से चलता है, और नैतिकता कानून से ऊपर होती है।
मनुस्मृति और अंबेडकरवाद बनाम मनुवाद की राजनीतिक बहस पर दंडी स्वामी ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1794 में विलियम जोन्स द्वारा मुद्रित पुस्तक वास्तविक मनुस्मृति का सही स्वरूप नहीं है।
उन्होंने कहा, "अगर राहुल गांधी मनुस्मृति पर सवाल उठाते हैं, तो मैं उन्हें खुली चुनौती देता हूं कि वे सभी धर्मों, उनके ग्रंथों और उनमें महिलाओं की स्थिति पर खुला तुलनात्मक विमर्श करवाएं। साथ ही अगर मनुवाद बनाम अंबेडकरवाद पर बात होती है, तो अंबेडकर-इस्लाम और गांधी-ईसाई धर्म पर भी चर्चा होनी चाहिए।"
राजनीति में साधुओं की भूमिका पर बोलते हुए स्वामी जितेंद्रानंद ने माना कि सन्यासी को निचले स्तर की दलीय राजनीति में नहीं उतरना चाहिए। हालांकि, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भारतीय राजनीति में एक अपवाद बताया।
उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ को राजनीति गोरक्षनाथ पीठ की परंपरा के तहत विरासत में मिली है और पिछले 10 सालों में उन्होंने यूपी में गुंडों और माफियाओं के राज को खत्म कर कानून का शासन स्थापित किया है। जबकि राम मंदिर आंदोलन के बाद संसद पहुंचे कई अन्य भगवाधारियों ने बाद में जातियों के धर्माचार्य बनकर जनता को छलने का काम किया।
वैश्विक हालातों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका और रूस जैसे बड़े देश इस समय लंबे युद्धों में उलझे हुए हैं, जबकि भारत की सीमाएं और आंतरिक सुरक्षा बेहद मजबूत है।
उन्होंने एक बड़ी भविष्यवाणी करते हुए कहा कि 2027 से 2031 के बीच तीसरा विश्व युद्ध होना तय है। इस युद्ध में अपनी सीमाएं लांघने वाले अमेरिका को सबसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा और उसका विघटन व विध्वंस दोनों संभव है, जबकि भारत एक महाशक्ति और 'अखंड भारत' के रूप में उभरेगा।