
शिक्षानगरी सीकर में लगातार बढ़ते एजुकेशन और खाटूश्यामजी में बढ़ते धार्मिक कॉरिडोर की वजह से अवैध कॉलोनियों की अमरबेल लगातार पनप रही है। राजस्थान पत्रिका में लगातार अवैध कॉलोनियों का मुद्दा प्रकाशित होने के बाद यूआइटी सचिव की ओर से 35 अवैध कॉलोनियों के लोगों को नोटिस जारी किए हैं। दूसरी तरफ अवैध कॉलोनियों के लिए जिलेभर में बड़े स्तर पर सर्वे की कवायद भी शुरू हो गई है। पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि सीकर शहर के अलावा सीकर ग्रामीण, पलसाना, खाटूश्यामजी, खंडेला व दांतारामगढ़ इलाके में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां पनप रही हैं।
शिक्षानगरी में अवैध कॉलोनियों की संख्या बढ़ने की असली वजह यह है कि यहां पिछले 20 सालों में यूआइटी व नगर परिषद की ओर किसी भी कॉलोनी की बसावट नहीं हो सकी। ऐसे में लोगों को निवेश के साथ आशियाने की आस पूरी करने के लिए निजी कॉलोनाइजर्स की ओर से डवलप कॉलोनियों का सहारा लिया जा रहा है। शिक्षानगरी का ढाई साल से मास्टर प्लान नहीं आने की वजह से कई कॉलोनाइजर्स की ओर से कृषि भूमि पर ही कॉलोनी बसाई जा रही है।
प्रशासन की ओर से अवैध कॉलोनियों की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि जिले में 100 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों की बसावट हो चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनी सीकर शहर के आसपास व खाटूश्यामजी इलाके में विकसित हुई है। अवैध कॉलोनियों की वजह से सरकार को राजस्व का नुकसान होने के साथ जनता की गाढ़ी कमाई का निवेश भी उलझ सकता है।
कृषि भूमि का गैर कृषि उपयोग करने के लिए भूमि रूपांतरण कराने प्रावधान है। वहीं यूआइटी या नगर परिषद व रेरा में पंजीयन होता है। पेयजल, बिजली और सीवरेज तंत्र विकसित करना होता है। इसके अलावा सड़कों भी विकासकर्ता को ही बनानी होती है।
केस एक: भुगतान पूरा, फिर भी 13 साल बाद रजिस्ट्री नहीं
दिल्ली निवासी अनिल भार्गव ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत दी कि वर्ष 2013 में उन्होंने डूकिया इलाके में 1100 वर्गगज जमीन ली थी। आरोप है कि भुगतान पूरा करने के बाद भी अब तक महज 700 वर्गगज जमीन की रजिस्ट्री हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब रियल एस्टेट कंपनी से अब संपर्क भी नहीं हो पा रहा है।
केस दो: दो बार हो चुकी रजिस्ट्री, पैसा भी नहीं मिल रहा वापस
दिल्ली निवासी आर्यन कुमार ने बताया कि चार साल पहले दिल्ली निवासी एक डेवलपर से डूकिया इलाके में 400 वर्गगज का भूखंड लिया था। पहले नोटरी कराकर पूरा भुगतान ले लिया था। अब तक रजिस्ट्री नहीं कराई गई। पिछले दिनों संपर्क किया तो पता लगा कि भूखंड की दो बार रजिस्ट्री हो चुकी है।
अवैध कॉलोनियों को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। पिछले दिनों सर्वे में सामने आई 35 अवैध कॉलोनियों को नोटिस जारी कर दिए है। यूआइटी की ओर से सभी जोन में कृषि भूमि पर बसने वाली अवैध कॉलोनियों का सर्वे कराया जा रहा है।
जगदीश गौड़, सचिव, यूआइटी, सीकर