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चुनावी साल में अनाथ बेटियों का सहारा बनेगी राजस्थान सरकार, बनाई ऐसी योजना

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Updated: 2 Jul 2018, 5:30 PM IST
vasundhara raje
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सीकर. चुनावी साल में सरकार ने अनाथ बेटियों का दर्द महसूस किया है। जिन बेटियों के माता-पिता दोनों नहीं है उनके दसवीं के बाद का अधिकांश खर्चा राज्य सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री हमारी बेटियां योजना में सरकारी विद्यालयों में पढ़कर दसवीं परीक्षा में टॉपर रहने वाली हर जिले की दो मेधावी छात्राओं व एक बीपीएल परिवार की छात्रा को पहले ही वित्तीय सहायता दी जा रही थी। अब इसी वर्ष से योजना में अनाथ बालिकाओं को भी जोड़ दिया गया है। अब हर जिले से एक बेटी को और लाभ दिया जाएगा। इस प्रकार हर जिले से कुल चार बेटियों को लाभान्वित किया जाएगा।


इस राशि का वहन बालिका शिक्षा फाण्डेशन जयपुर की ओर से किया जाएगा। उसी अनाथ बेटी को यह सहायता दी जाएगी जिसने दसवीं में 70 फीसदी या इससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। बालिका की मेरिट की गणना उस जिले में होगी, जहां उसने दसवीं की परीक्षा दी है, चाहे वह कहीं की भी रहने वाली हो।


अगर मेरिट बदल गई तो

कई बार पुर्नमूल्यांकन के बाद अंकों में बदलाव हो जाता है। यदि इसके तहत छात्रा के स्थान में बदलाव आता है और बदलाव होने तक बालिका को वित्तीय लाभ दिया जा चुका है तो दी हुई सहायत वापस नहीं की जाएगी। दो बालिकाओं के समान अंक होने पर जिस बालिका के क्रमश गणित, विज्ञान और अंग्रेजी में अधिक अंक होंगे, उसका चयन किया जाएगा। इन विषयों के भी समान अंक होने पर अधिक उम्र वाली बलिका का चयन किया जाएगा।

इस प्रकार मिलेगी सहायता

चयनित बालिकाओं को कक्षा 11 से स्नात्कोत्तर की शिक्षा/ प्रशिक्षण प्राप्त करने तक दी जाएगी। कक्षा 11/ व्यावसायिक शिक्षा में अध्ययन के लिए पाठ्यपुस्तकें, स्टेशनरी, यूनिफार्म के लिए 15 हजार रुपए दिए जाएंगे। कोचिंग तैयारी व अन्य के लिए एक लाख रुपए हर वर्ष दिए जाएंगे। कक्षा बारह के बाद स्टेशनी व अन्य के लिए 25 हजार तथा शिक्षण फीस/ कोचिंग व अन्य के लिए अधिकतम दो लाख रुपए का भुगतान किया जाएगा।

इनका कहना है...
हर जिले से एक अनाथ बेटी को मुख्यमंत्री हमारी बेटियां योजना में लाभान्वित किया जाएगा। इससे बेटियों को सम्बल मिलेगा। कई बार आर्थिक तंगी के कारण बेटियां मेधावी होते हुए भी पढ़ाई नहीं कर पाती, ऐसी बेटियों को फायदा होगा। उनके सपने पूरे हो सकें गे।

-पवन कुमार, एडीइओ सीकर

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