
यह किसानों के लिए राहत की खबर है। जिले में अब कीटनाशी की दुकानों पर प्रशिक्षित व्यक्ति ही बिक्री कर सकेगा। भूमि की गिरती उर्वरता और फसल व सब्जियों में कीटनाशी की मात्रा ज्यादा होने से असाध्य रोग बढ़ते जा रहे हैं। इसे देखते हुए हर प्रत्येक दुकानदार के लिए पेस्टीसाइड मैनेजमेंट सर्टिफिकेट कोर्स के लिए 12 दिन का प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। प्रशिक्षण में 80 प्रतिशत उपस्थिति होने के बाद ही लिखित परीक्षा होगी। इसमें 40 प्रतिशत से अधिक अंक लाने पर प्रमाण पत्र मिलेगा। प्रमाण पत्र नहीं लेने पर बिक्री करने पर संबंधित विक्रेता का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।
12 सप्ताह देंगे प्रशिक्षण
राष्ट्रीय पादप स्वस्थ्य प्रबंधन संस्थान, हैदराबाद की ओर से 12 सप्ताह का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। प्रशिक्षण में चार दिन की फील्ड विजिट व आठ दिन की क्लास लेनी जरूरी होगी। फील्ड विजिट में प्रशिक्षण लेने वाले विक्रेताओं को कॄॄषि विज्ञान केंद्र व कीटनाशक बनाने वाली फर्म और किसानों के खेतों का भ्रमण करवाया जाएगा। सप्ताह में एक दिन कृषि विभाग के विशेषज्ञ जानकारी देंगे।
इसलिए किया जरूरी
कृषि विभाग का मानना है कि अंधाधुंध कीटनाशकों के छिड़कने के कारण खेती की पूरी प्रक्रिया बदल गई है। भूमि व फसल की उर्वरता बनाए रखने के लिए संतुलित मात्रा में कीटनाशकों का स्प्रे जरूरी है। इसे देखते हुए कीटनाशकों की बिक्री के लिए योग्यता का मापदंड एक विषय में स्नातक की उपाधि लेना जरूरी है। 2017 से पहले के विक्रेताओं के लिए यह नहीं जरूरी था।
प्रथम बैच शुरू
आत्मा परियोजना के प्रशिक्षण हॉल में कीटनाशी विक्रेताओं के पहले बैच का प्रशिक्षण शुरू हुआ। इसमें संयुक्त निदेशक कृषि आत्मा रामनिवास पालीवाल, पूर्व संयुक्त निदेशक प्रमोद कुमार, फेसीलेटर भागीरथ सबल, सहायक निदेशक रामनिवास ढाका, कृषि अधिकारी शंकर लाल जाट व राजेन्द्र प्रसाद सामोता ने विक्रेताओं को कीटनाशी अधिनियम की जानकारी दी ।