लगभग 36 घंटे तक किसानों ने सीकर-जयपुर हाईवे (एनएच 52) पर रामूकाबास तिराहे पर जाम लगाकर सरकार को जमकर ललकारा।
सीकर.
प्रदेश के अन्नदाता ने फिर सरकार को झुका दिया है। लगभग 36 घंटे तक किसानों ने सीकर-जयपुर हाईवे (एनएच 52) पर रामूकाबास तिराहे पर जाम लगाकर सरकार को जमकर ललकारा। शुक्रवार रात करीब 12.40 बजे जेल से रिहा होकर किसान नेता अमराराम सीकर पहुंचे। रामूका बास तिराहे पर किसानों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने शनिवार से होने वाले राजस्थान चक्काजाम स्थगित करने की घोषणा की साथ ही रामूकाबास तिराहे से जाम भी हटा दिया गया।
अमराराम ने कहा कि सीकर के किसानों ने हमेशा सरकार को झुकाने का काम किया है। इस बार तो घबराई सरकार ने किसानों को जयपुर ? में घुसने से ही रोक दिया। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण कर्जा माफी की मांग को लेकर किसानों का संघर्ष लगातार जारी रहेगा। अमराराम ने कहा कि सरकार ने इस बार तो किसान को डऱाने के लिए जेल भी भिजवा दिया। लेकिन प्रदेश का किसान घबराने के बजाय सडक़ पर डटा रहा।
इससे पहले किसानों ने पड़ाव स्थल सर्किल को एक राय से किसान सर्किल बनाने का आह्वान किया। किसानों के आक्रोश को देखते हुए सरकार झुकी। सरकार ने शुक्रवार शाम को प्रदेश की जेलों में बंद 169 किसानों नेताओं को रिहा कर दिया। इसके बाद किसान नेता अपने-अपने पड़ाव स्थलों की और रवाना हो गए।
किसान नेताओं की रिहाई के बाद अखिल भारतीय किसान सभा ने भी शनिवार को भी प्रस्तावित चक्काजाम के फैसले को वापस ले लिया है। इससे शेखावाटी सहित छह जिलों के लोगों ने राहत की सांस ली। इससे पहले किसान दिनभर जयपुर हाइवे पर रामूका बास तिराहे के पास सडक़ पर टैंट लगाकर डटे रहे। वहीं दोपहर से ही शनिवार के चक्काजाम की तैयारी होने लगी।
गौरतलब है कि 22 फरवरी को जयपुर विधानसभा कूच के लिए जाते समय किसानों को रामूका बास तिराहे के पास रोक लिया था। इसके बाद किसान सडक़ों पर बैठ गए। वहीं जयपुर जाते समय कुछ किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था।
...और ऐसे बनी बात: प्रशासन ने सरकार को भेजा प्रस्ताव
जिला प्रशासन शुक्रवार को दिनभर सागर खाचरिया व रामरतन बगडिय़ा सहित अन्य किसान नेताओं को वार्ता के लिए बुलाता रहा। लेकिन नेताओं ने वार्ता के लिए आने से मना कर दिया। किसान नेताओं ने पहले गिरफ्तार नेताओं को रिहा करने का प्रस्ताव दिया। इस पर कलक्टर ने राज्य सरकार को किसानों की मांग पहुंचाई। शाम को नेताओं को रिहा कर दिया गया।
कर्जा माफी...
किसान आन्दोलन में शेखावाटी से रामूका बास पड़ाव स्थल पर पहुंचे किसानों का कहना है कि कर्जा माफी की मांग को लेकर वह पहुंचे है। उनका कहना है कि सरकार ने कर्जा माफी की जो घोषणा की उससे किसानों का भला नहीं होने वाला है। क्योंकि सरकार ने सिर्फ सहकारी बैंकों से कर्जा लेने वालों का कर्जा माफ किया है। जबकि व्यापारिक बैंक से लोने वालों को कोई राहत नहीं दी।
बनाई अस्थाई जेल
किसान आन्दोलन के लिए सीकर में जिला प्रशासन ने अस्थाई जेल बनाई जाएगी। हालांकि प्रशासन ने यह तय नहीं किया है कि अस्थाई जेल कहां बनाई जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने हर हालात से निपटने के लिए यह निर्णय राज्य सरकार को भिजवाया था।
छोटे वाहन निकाले
रोडवेज बसों का संचालन अन्य मार्गों से हुआ। छोटे वाहन, एंबुलेंस व सेना की गाडिय़ों को निकाला गया।
सडक़ से सदन तक... सिक रही सियासत की रोटी
कांगे्रस ने भी दिखाई सक्रियता
सीकर. कर्जा माफी के मामले में जारी सियासत शुक्रवार को सदन से लेकर सडक़ तक जारी रही। किसान नेता जहां सरकार को घेरते रहे। वहीं कांग्रेस नेताओं ने भी सदन में तीखे तेवरों के जरिए किसानों का पक्ष रखा। कांग्रेस नेताओं ने भी किसानों को जेलों में बंद मामले की निन्दा की। कर्जा माफी का मामला विधानसभा में गूंजा। नवलगढ़ विधायक राजकुमार शर्मा ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से उठाया। शर्मा ने कहा कि किसान व प्रशासन आमने-सामने हो गए हैं शेखावाटी में कोई भी अनहोनी घटना हो सकती है। छह जिलों से अधिक के लोग परेशान हो रहे है। विधायक शर्मा अनिश्चितकालीन धरने पर भी बैठ गए। वहीं लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविन्द सिंह डोटासरा ने भी मामला उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सुराज संकल्प यात्रा में घोषणा की थी। लेकिन किसानों को अब तक कुछ नहीं मिला है। इस पर सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक ने कर्जा माफी का जवाब दिया। सदन में कांगे्रस व भाजपा नेताओं में तकरार हुई।