सिंगरौली

मवेशियों में फैला गलघोंटू रोग, संक्रमण से दो दर्जन की मौत

चितरंगी क्षेत्र के लमसरई में हो रही घटनाएं , अकेले दोरज गांव में 7 दुधारू पशु मरे , नहीं पहुची चिकित्सा टीम

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Animal death due to Hemorrhagic Septicemia

सिंगरौली. चितरंगी क्षेत्र के लमसरई में मवेशियों में गलघोंटू और एकटंगिया रोग की बीमारी फैल गई है। पिछले दो तीन में डिघवार पंचायत के दोरज गांव में 7 पशुओं की गलघोटु से मौत हो चुकी है।

इसके साथ ही रमडीहा, लमसरई, पोड़ी, रतनपुरवा, कैथानी में दो दर्जन से ज्यादा मवेशियों की मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि इन गांवों में टीकाकरण नहीं होने से दुधारू पशु इस रोग की चपेट में आ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि 15 दिन से बीमारी गांवों में फैली है लेकिन सूचना के बाद भी चिकित्सा टीम नहीं पहुंची है। लापरवाही का आलम यह है कि पशु चिकित्सालय में चिकित्सक नहीं बैठ रहे हैं।

लमसरई में पशु चिकित्सा केंद्र कई साल से खोला गया है, पर पशु चिकित्सक मौजूद नहीं रहते। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। पिछले साल भी बीमारी फैली थी। बारिश के मौसम में पशुओं में संक्रामक बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। बीमारी में मवेशी खाना बंद कर देता है और कराहता है।

समुचित इलाज न मिलने पर मवेशियों की मौत हो जाती है। पशु चिकित्सा विभाग को जून माह में बचाव के टीके लगवाने चाहिए पर ये टीके बड़ी मात्रा में अस्पतालों में रखे हुए हैं। उधर, टीके न लगाए जाने से मवेशी बीमार हो रहे हैं।

इन पशुपालकों के पशुओं की हुई मौत
दोराज के मुन्ना सिंह, राम चरन वैश्य, अनंत वैश्य, लालता वैश्य, फूलन के पशुओ की बीमारी से मौत हो गई। पशुपालको का कहना है कि ये पशु ही उनकी जमापूंजी है जो खत्म होते जा रहे हैं। न तो चितरंगी और न ही लमसरई में चिकित्सक बैठ रहे। शिकायत के बाद भी कोई इलाज नहीं मिल रहा।

लमसरई में पदस्थ चिकित्सक बैढऩ कार्यालय में अटैच
चितरंगी एवं लमसरई पशु चिकित्सालय के आस - पास कई गांव हैं। जहां के लोग पशु पालक हैं। प्रत्येक घर में पशु हैं। लमसरई पशु चिकित्सालय में कोई डॉक्टर ही नहीं हैं। वहां पदस्थ पशु चिकित्सक बैढऩ मुख्यालय में स्थित कार्यालय में अटैच है। ऐसे में गांव के लोग बेहद परेशान हैं।

उचित उपचार नहीं मिल पाने की वजह से प्रतिदिन पशु मर रहे हैं। जिससे लोगों को काफी हानि उठानी पड़ रही है। लमसरई पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्सक डॉ. मिताली को पदस्थ किया गया है। उन्हें वहां रहकर प्रतिदिन चिकित्सालय जाना चाहिए। पशु चिकित्सालय में आने वाले बीमार पशुओं का उपचार करना चाहिए या फिर गांव में जाकर पशुओं का उचार करना चाहिए।

अपनी पदस्थापना के कुछ दिन वहां रहने के बाद मिताली बैढऩ मुख्यालय स्थिति पशु कार्यालय में आ गईं।

डॉ. मिताली पशुओं का उपचार करने की बजाय फाइल तैयार करने में ज्यादा रुचि ले रही हैं। वे लिपिक का काम कर रही हैं।

चितरंगी में पशु चिकित्सालय तो है लेकिन यहां भी नियमित रूप से पशु चिकित्सक की पदस्थापना नहीं की गई है। वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर काम चलाया जा रहा है। चितरंगी ब्लॉक मुख्यालय है। इसके बावजूद यह हालत है। बेरहद पशु चिकित्सालय में पदस्थ मीनष तिवारी को चितरंगी का भी प्रभार दिया गया है।

बैरहद एवं चितरंगी दोना स्थानों पर तिवारी ही देख रहे हैं। डॉ. तिवारी को तीन दिन बैरदह एवं तीन दिन चितरंगी की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन वे भी अक्सर गायब रहते हैं।

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Updated on:
11 Aug 2018 12:35 pm
Published on:
11 Aug 2018 12:23 pm
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