कोयला खनन के लिए तय हुई एजेंसियां ....
सिंगरौली. जिले में दो और नई कोल खदानों के लिए एजेंसियां तय कर ली गई हैं। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय स्तर से ऑनलाइन आवंटन की प्रक्रिया पूरी करते हुए दोनों खदानों के लिए दो अलग-अलग एजेंसियां तय की गई हैं। चयनित एजेंसियां खदानों से कोयला निकालने के एवज में राज्य सरकार को करीब 1200 करोड़ का राजस्व प्रति वर्ष देंगी। उसके बाद के वर्षों में तय शर्तों के अनुरूप राजस्व में बढ़ोत्तरी होती जाएगी।
देश के अलग-अलग राज्यों में कोल खदानों के आवंटन की प्रक्रिया के तहत यहां मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में दो खदानों का आवंटन किया गया है। इन दोनों कोल खदानों का क्षेत्र क्रमश: जिले के बंधा व धिरौली गांव है। सूत्रों के मुताबिक बंधा गांव में कोल खनन की जिम्मेदारी इमिल माइंस एंड मिनरल रिसोर्सेज लिमिटेड को दिया गया है। इसी प्रकार धिरौली गांव में कोयला खनन की जिम्मेदारी स्ट्राटटेक मिनरल रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड को मिली है।
बताया गया कि बंधा में कोल खनन के बदले चयनित कंपनी राज्य शासन को 799.82 करोड़ रुपए वार्षिक का राजस्व देगी। जबकि धिरौली में खनन के लिए चयनित कंपनी से प्रत्येक वर्ष 398.27 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होगा। गौरतलब है कि इन दोनों खदानों की बोली में अडानी इंटरप्राइजेज और अरविंदो रियालिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल हुई थी। बताया गया कि बंधा में भूगर्भीय भंडारण 441 मैट्रिक टन और धिरौली में 586.39 मैट्रिक टन है।
इधर, दो खदानों में खनन शुरू करने की तैयारी
जिले में पूर्व में आवंटित दो खदानों में खनन शुरू करने की तैयारी है। एपीएमडीसी व टीएचडीसी की ओर से भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। विस्थापितों को मुआवजा वितरण भी लगभग पूरा होने चला है। अधिकारियों के मुताबिक अब विस्थापितों के लिए कालोनी बनाया जाएगा। उम्मीद है कि वर्ष 2021 में मार्च या अपै्रल तक कोयला खनन का कार्य शुरू हो जाएगा।