क्षमता से अधिक कैदी, अव्यवस्था से बढ़ी वारदात की आशंका, पुख्ता इंतजाम नहीं, सीसीटीवी तक लगाना भूले, डीजी जेल के आदेश दरकिनार, नहीं चेते जेल अधीक्षक
सिंगरौली। अब तो जिला जेल की सुरक्षा भी भगवान भरोसे है। न तो सीसीटीवी कैमरे लगे और न ही जेल परिसर में पुख्ता इंतजाम किया गया है। ऐसे में भला यह कैसे कह सकते हैं कि जिला जेल सुरक्षित है। बतादें कि गत माह डीजी जेल जीआर मीणा ने जिला जेल पचौर का निरीक्षण किया था। डीजी के निरीक्षण में जिला जेल में भारी कमियां सामने आई थी। जिसे देखकर डीजी ने जेल अधीक्षक को जेल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए थे।
ये है मामला
बताते चलें कि छत्तीसगढ़, बिहार व उप्र प्रांत से सटे जिला जेल पचौर में लगभग आठ खूंखार कैदी होना बताया गया है, जिसमें तीन खूंखार कैदी यूपी व बिहार के बताए गए हैं। इसके बाद भी जिला जेल की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद नहीं दिख रही है।
200 कैदी रखने की क्षमता
जेल में सीसीटीवी कैमरा सहित अन्य सुरक्षा इंतजाम जेल प्रशासन ने अब तक नहीं कराया है। जेल कर्मियों की संख्या भी मानक के अनुरूप नहीं है। कैदियों की भारी भीड़ को संभालने के लिए सुरक्षा कर्मी गिनती भर के रह गए हैं। बताया गया है कि इस जेल में लगभग 200 से अधिक कैदी रखने की क्षमता नहीं है, लेकिन शुक्रवार को 450 कैदियों को यहां सीखचों के अंदर रखा गया है।
राजधानी में घटना के बाद सुरक्षा बढ़ाने दिये थे निर्देश
बता दें कि गत साल राजधानी में हुई घटना के बाद प्रदेशभर के जेलों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन सिंगरौली के जिला जेल में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की उम्मीदों पर जेल अधीक्षक ने पानी फेर दिया। गत साल राजधानी के केंद्रीय जेल में सिमी के आठ आतंकियों की फरारी व मुठभेड़ के बाद भी समूचे प्रदेश में जिला जेल की सुरक्षा जस की तस बनी है। बल्कि सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के बजाय पहले से भी लचर हो गई है।
ताक पर सुरक्षा, नहीं लगाए सीसीटीवी
जिला जेल में सुरक्षा के मद्देनजर सीसीटीवी नहीं लगाए गए हैं, साथ ही परिजन जब मिलने जाते हैं तो बैरकों से बाहर निकालने के दौरान सभी पर जेल प्रशासन कड़ी नजर रखता है, लेकिन जिला जेल में सीसीटीवी कैमरा नहीं होने की वजह से जेल में सजा काट रहे खूंखार कैदियों पर अधीक्षक नजर नहीं रख पा रहे हैं। मतलब, सुरक्षा ताक पर रखकर जिला जेल में मनमानी का सिलसिला बड़ी घटनाएं होने के बाद भी बदस्तूर जारी है। इससे कभी भी खूंखार कैदी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं।
अधीक्षक की निगरानी करता है सीसीटीवी
जमानत पर छूटे बंदियों की मानें तो जिला जेल में जहां अधीक्षक बैठते हैं। वहां पर सीसीटीवी अधीक्षक की निगरानी करता है। हैरत की बात तो यह है कि गेट पर सीसीटीवी नहीं लगाया गया है, जिससे वहां की तस्वीर सीसीटीवी की निगरानी में नहीं रहता है। जिस वजह से जिला जेल के अंदर वसूली भी की जा रही है। जिला जेल के गेट के पास सीसीटीवी लगाया जाना विशेष जरूरी माना गया है। बताते हैं जिला जेल में कैदियों के लिए बने बैरक में क्षमता से अधिक कैदियों को रखा जा रहा है। एक बैरक में लगभग ५० कैदियों को रख सकते हैं, लेकिन जेल में एक बैरक में 60 से अधिक कैदियों को रखा जा रहा है।
जिला जेल में सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम रहता है और अभी भी सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी नजर रखी जा रही है। निरीक्षण के दौरान डीजी जेल ने सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया था। मगर, कहने में और लगाने में बहुत फर्क है।
इन्द्रदेव तिवारी, उप जेल अधीक्षक, जिला जेल पचौर