आवंटित कोल खदानों में जंगल का रकबा अधिक, कटेंगे लाखों पेड़ पर्यावरण दिवस पर विशेष
सिंगरौली. देश के विकास के लिए ऊर्जाधानी सिंगरौली के रहवासियों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि आने वाला समय और भी भयानक होगा। अधिक से अधिक कोयला खनन के लिए वर्षों पुराने जंगल उजाड़े जा रहे हैं, लेकिन नए जंगल तैयार करने की कवायद सुस्त है। इसकी वजह कंपनियों की पौधरोपण को लेकर सुस्त कार्यप्रणाली मानी जा रही है।
जिले में एनसीएल के अलावा एपीएमडीसी व टीएचडीसी को कोयला खनन के लिए ब्लॉक आवंटित किया गया है। साथ ही अब निजी कंपनियां भी खनन के लिए आ रही है। अदाणी व बिड़ला ग्रुप को भी कोयला खनन के लिए ब्लॉक आवंटित किया गया है। जल्द से जल्द कोयला खनन की तैयारी में लगी कंपनियों द्वारा वन विभाग व राजस्व सहित निजी भूमि पर मौजूद लाखों की संख्या में पेड़ों को धराशायी किया जाएगा। यह बात और है कि उसके अनुरूप जंगल तैयार नहीं हो रहे हैं। नतीजा यहां का पर्यावरण संतुलन खतरे में पड़ गया है। वर्षों बाद पिछले महीने 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा तापमान पर्यावरण असंतुलन का नतीजा माना जा रहा है। क्योंकि पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई है।
दूसरे जिलों में जमीन दे रही कंपनियां
नियमानुसार खनन के लिए कोल ब्लॉक आवंटित होने के बाद जंगली क्षेत्र से दो गुना रकबा कंपनियों को वन विभाग को देना पड़ता है। साथ ही पौधरोपण के लिए खर्च भी अदा करना पड़ता है। वन विभाग पौधरोपण कराता है। यही प्रक्रिया राजस्व की जमीन में जंगल होने पर पूरी की जाती है। नियम-शर्तों का फायदा उठाते हुए कंपनियां जंगल भले सिंगरौली का उजाड़ रही हैं, लेकिन पौधरोपण के लिए जमीन दूसरे जिलों में दी जा रही है। नतीजा सिंगरौली को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। एपीएमडीसी ने सीधी के संजय टाइगर रिजर्व के पास व बगदरा में जमीन दिया है। जबकि निजी कंपनियां दूसरे जिलों में जमीन देने की तैयारी में हैं।
ऐसे समझिए स्थिति
एपीएमडीसी का सुलियरी कोल ब्लॉक
क्षेत्रफल - 1297 हेक्टेयर
भंडारित कोयला - 1000 मिलियन टन
जंगली क्षेत्र - कुल क्षेत्रफल का 80 फीसदी
पेड़ों का अनुमान - सवा लाख से अधिक
इएमआइएल माइंस एंड मिनरल रिसोर्सेज लिमिटेड की बंधा कोल माइंस
क्षेत्रफल 1600 हेक्टेयर
भंडारित कोयला - 441 मिलियन टन
जंगली क्षेत्र - 85 फीसदी
पेड़ों का अनुमान - एक लाख से अधिक
मेसर्स स्ट्राटाटेक मिनरल्स रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड की धिरौली कोल माइंस
क्षेत्रफल 2672 हेक्टेयर
भंडारित कोयला 586.39 मिलियन टन
जंगली क्षेत्र 90 फीसदी
पेड़ों का अनुमान - करीब एक लाख
वर्जन -
कोयला खनन के लिए आने वाले कंपनियों को वन भूमि पर खनन की अनुमति इसी शर्त पर दी जाती है कि वह बदले में जमीन व पौधरोपण के लिए खर्च देंगी। एपीएमडीसी से अभी हाल में रकम मिली है। जमीन संजय टाइगर रिजर्व व बगदरा सहित कई इलाकों में चिह्नित है। पौधरोपण की प्रक्रिया शुरू है। बाकी की कंपनियों की प्रक्रिया प्रचलन में हैं।
मधु वी राज, डीएफओ सिंगरौली।