सिंगरौली

जिला पंचायत कार्यालय में धूल खा रही 4 हजार अध्यापकों की सेवा पुस्तिका, ये है मुख्य कारण

अध्यापकों को नहीं मिल पा रहा एरियर का लाभ
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ceo zila panchayat singrauli
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सिंगरौली। जिला पंचायत में अध्यापकों की करीब चार हजार सेवा पुस्तिका महीनों से धूल खा रही है। अध्यापक सेवा पुस्तिका में सत्यापन के लिए चक्कर लगा रहे हैं। जिला पंचायत में पदस्थ एकाउण्टेंट को सत्यापन करने का समय नहीं मिल रहा है। जानबूझकर टाल-मटोल कर रहे हैं। जिला पंचायत में दो एकाउंटेंट हैं। शिक्षकों की सेवा पुस्तिका का कार्य मनरेगा में पदस्थ प्रियंका सिंह को दिया गया है। सूत्रों का दावा है कि एक सेवा पुस्तिका के सत्यापन के लिए जिला पंचायत में एकाउंटेट शिक्षकों को परेशान कर रहे हैं। सेवा पुस्तिका का सत्यापन नहीं होने से फाइल जिला पंचायत में महीनों धूल फांक रही है।

वरिष्ठता सूची जारी करने में देरी
शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों की माने तो 1 अप्रेल 2018 को जिला पंचायत से अध्यापकों की वरिष्ठता सूची जारी हो जाना चाहिए, लेकिन अभी तक वरिष्ठता सूची नहीं जारी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब पदोन्नति का रास्ता भी खुल गया है, लेकिन जिला पंचायत से अध्यापकों को निराशा मिल रही है। हालत यह है कि अभी तक वरिष्ठता सूची नहीं जारी हुई है।

पढ़ाई भी प्रभावित
जिला पंचायत के अधिकारियों की मनमानी की वजह से बच्चों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ रहा है। हाई एवं हायर सेकण्डरी स्कूल में ज्यादातर पद पदोन्नति के जरिए भरे जाते हैं। पदोन्नति नहीं होने की वजह से पद अभी भी खाली पड़े हुए हैं। ऐसे में हाई एवं हायर सेकण्डरी स्कूल के बच्चो की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

छठवें वेतनमान का एरियर भुगतान अटका
सेवा पुस्तिका का सत्यापन नहीं होने की वजह से अध्यापकों को हानि उठानी पड़ रही है। छठवें वेतनमान के एरियर का भुगतान नहीं हो पा रहा है। सहायक अध्यापक, अध्यापक एवं वरिष्ठ अध्यापक की नियुक्ति जिला पंचायत से की गई है जिसकी वजह से इनकी सेवा पुस्तिका का सत्यापन भी वहीं से होना है। जिले भर में कुल 46 00 सहायक अध्यापक, अध्यापक, वरिष्ठ अध्यापक पदस्थ हैं। इसमें से महज 6 00 के करीब अध्यापकों की सेवा पुस्तिका का सत्यापन हुआ है। करीब 4 हजार ऐसे अध्यापक हैं जिनकी सेवा पुस्तिका का सत्यापन जिला पंचायत में अटका हुआ है।

संकुल स्तर से पूरी हो चुकी है प्रक्रिया
नियमों के मुताबिक संबंधित संकुल प्राचार्य अध्यापकों की सेवा पुस्तिका की आवश्यक कार्रवाई पूरा कर जिला पंचायत में प्रस्तुत कर दिये हैं। अब आगे की कार्रवाई जिला पंचायत से होनी है। जानकारों की मानें तो सेवा पुस्तिका का सत्यापन अधिकतम एक दो दिन में हो जाना चाहिए, लेकिन सत्यापन में तीन महीने से ज्यादा का समय लगना यह प्रदर्शित करता है कि जिला पंचायत में बैठे अधिकारियों की मंशा सही नहीं है। यही वजह है कि अध्यापक परेशान हो रहे हैं।

Published on:
02 Jul 2018 08:45 pm