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दो से ज्यादा संतान होने के कारण सिंगरौली सब रजिस्ट्रार की सेवाएं समाप्त

Two Child Rule: आईजी पंजीयन ने जारी किया सब रजिस्ट्रार की सेवाएं समाप्त करने का आदेश, पहले स्टांप घोटाले में निलंबित हो चुके थे सब रजिस्ट्रार।

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sub registrar service terminated over third child rule, दो से ज्यादा संतान होने के कारण सिंगरौली सब रजिस्ट्रार की सेवाएं समाप्त (source-patrika)

Singrauli Sub Registrar Dismissed: मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में पदस्थ सब रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। दो से ज्यादा संतान होने के मामले में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त किया गया है। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग मध्यप्रदेश के महानिरीक्षक पंजीयन द्वारा 11 जून 2026 को जारी आदेश में यह कार्रवाई की गई है। आदेश के अनुसार विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। जिसके बाद मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं।

सब रजिस्ट्रार की सेवाएं समाप्त

जारी आदेश के मुताबिक अशोक सिंह परिहार जो वर्तमान में सिंगरौली में उप पंजीयक के पद पर कार्यरत थे। उन पर आरोप था कि शासकीय सेवा के दौरान उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ। जांच में पाया गया कि उनके पुत्र अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। इस तथ्य की पुष्टि कलेक्टर सिंगरौली द्वारा गठित संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट तथा स्वयं परिहार द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से भी हुई है।

सरकारी सेवा के दौरान तीसरी संतान का हुआ जन्म

मामले की शिकायत के बाद वर्ष 2025 में विभागीय जांच प्रारंभ की गई थी। जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को नियुक्त किया गया था। जांच प्रतिवेदन में आरोप को सिद्ध बताया गया। इसके बाद अशोक परिहार को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें तीसरी संतान संबंधी नियमों की जानकारी नहीं थी तथा विभाग की ओर से इस संबंध में कोई विशेष सूचना भी प्राप्त नहीं हुई थी। हालांकि विभाग ने उनके इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशित उस प्रावधान का भी उल्लेख किया गया है। जिसके अनुसार 26 जनवरी 2001 अथवा उसके बाद दो से अधिक जीवित संतान रखने वाला व्यक्ति शासकीय सेवा अथवा पद के लिए पात्र नहीं माना जाता।

क्या है दो से अधिक संतान का नियम ?

मध्यप्रदेश शासन ने 10 मार्च 2000 को जारी अधिसूचना के माध्यम से दो से अधिक जीवित संतान वाले व्यक्तियों की शासकीय सेवा में पात्रता को लेकर प्रावधान लागू किया था। नियम के अनुसार 26 जनवरी 2001 या उसके बाद यदि किसी शासकीय कर्मचारी की तीसरी संतान जन्म लेती है तो वह सेवा संबंधी पात्रता और नियमों के दायरे में आता है। अशोक सिंह परिहार के मामले में जांच में पाया गया कि उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी किया है।

पहले भी स्टांप घोटाले में हो चुके हैं निलंबित

उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार का नाम इससे पहले भी चर्चित स्टांप घोटाले में सामने आ चुका है। वर्ष 2022 में सिंगरौली में करोड़ों रुपए के स्टांप शुल्क अनियमितता मामले की जांच के दौरान उन पर गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था। मामले में विभागीय जांच भी कराई गई थी और कई दस्तावेजों की पड़ताल की गई थी। अब तीसरी संतान संबंधी प्रकरण में विभागीय जांच के बाद उनकी सेवा समाप्त किए जाने की कार्रवाई हुई है। लगातार दूसरी बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के चलते विभाग में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।