
सिरोही। परम्परागत खेती को छोड़कर किसान आधुनिक तरीकों से खेती करने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर खेती में नई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसके चलते किसान मेहनत कम और मुनाफा अच्छा कमा रहे हैं। ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है किसान मांगी लाल ने।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह का मिला फायदा
जिला मुख्यालय के पास वराल निवासी किसान मांगीलाल माली की मेहनत तकनीकी खेत से रंग ला रही है। उन्होंने बताया कि वे पहले परम्परात फसलों की बुवाई करते थे। जिसमें रात-दिन मेहनत करनी पड़ती थी लेकिन, उसके अनुरूप आमदनी नहीं होती थी। कई बार तो काफी नुकसान हुआ। बाद में कृषि अधिकारियों से सलाह लेकर आधुनिक तरीके से खेती करने का मानस बनाया।
सालाना छह लाख की बचत
कृषि विशेषज्ञों की सलाह से सवा बीघा जमीन में पॉली हाउस लगाकर खीरे की खेती से शुरुआत की। पिछले डेढ़ साल से खीरे की खेती करने में जुटे हैं। जिससे सभी खर्चा निकालने के बाद सालाना करीब 6 लाख रुपए की बचत हो रही है। किसान ने बताया कि पॉली हाउस में साल में तीन फसल ली जा सकती है। लेकिन अच्छी उपज के लिए दो बार खेती करना ही उपयुक्त रहता है। जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है।
20-50 रुपए प्रति किलो बिकता है खीरा
खीरा बाजार में 20से 50 रुपए के भाव से बिकता है। मांगीलाल ने बताया कि एक दिन में करीब 100-150 किलो खीरा की बाजार में सप्लाई की जाती है। यह माल शिवगंज, सिरोही व अन्य शहर में बेचा जाता है। माली ने बताया कि खीरा की फसल 40 से 45 दिन में तैयार हो जाती है। ऐसे में जल्दी आमदनी शुरू हो जाती है। खीरे की फसल से कम समय, कम पानी व कम मेहनत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
ड्रिप से होती है सिंचाई
आधुनिक तकनीक खेती में बूंद-बूंद पद्धति से सिंचाई की जाती है। पॉली हाउस बनाने के लिए सीमांत व लघु किसानों को 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। वहीं खाद में वर्मी कम्पोस्ट, भेड़-बकरी का खाद सहित अन्य खाद काम में ली जा सकती है।