
environmental pollutionमाउंट आबू. एक तरफ सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बांधों, नदियों और अन्य जलस्रोतों के किनारे व टापू पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होटल व रिसोर्ट के लिए जमीन लीज पर देने जा रही है। वहीं, दूसरी और पर्यावरण के खतरे को लेकर बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा है। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में प्रदूषण के चलते हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
यहां पिछले 17 वर्ष से चल रहा सीवरेज का कार्य पूरी तरह से फेल हो चुका है। आज भी दर्जनों होटलों व घरों का गंदा पानी मुख्य नाले से होते हुए जंगल के रास्ते से होकर मुख्य नदियों तक पहुंच रहा है। जिससे पेयजल के साथ-साथ पर्यावरण को भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। हालांकि कुछ घरों और होटलों को सीवरेज लाइन से जोड़ा गया है, लेकिन भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए अधिकतर घर व होटल आज भी सीवरेज लाइन से नहीं जुड़े है। जबकि कुछ होटल अपने स्वयं के सेफ्टी टैंक लगाकर कार्य चला रहे है। आने वाले समय में अगर सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो पेयजल दूषित होने के साथ-साथ पर्यावरण को भी बड़ी क्षति पहुंचेगी।
खुले नाले में बहता है गंदा पानी
सरकार व प्रशासन की उदासीनता के चलते माउंट आबू में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट व एनजीटी के नियमों का भी खुलेआम मखौल उड़ रहा है। मुख्य शहर में बस स्टैण्ड रोड किनारे से गुजरने वाला नाला भी खुला होने के कारण गंदगी सामने नजर आने से पर्यटकों के बीच खूबसूरत शहर की छवि भी खराब हो रही है। इतना ही नहीं देलवाड़ा, तोरना, ढूंढई से होकर निकल रहा है गंदा नाला भी खुला होने से परेशानी हो रही है। वहीं, ढूंढई, माचगांव, इंदिरा कॉलोनी, अंबेडकर कॉलोनी सहित कई कॉलोनियों को अभी तक सीवरेज लाइन से नहीं जोड़ा गया है, वहीं कई होटल और अधिकतर घरों का गंदा पानी भी इन्हीं नालों से गुजरता है। जो आगे जाकर जंगल से रास्ते नदियों में मिलकर जल को दूषित कर रहा है।
- अधिकतर घरों व होटलों को सीवरेज लाइन से जोड़ा गया है। कुछ जगह पर कार्य बाकी है। कुछ होटलों ने सेफ्टी टैंक की लगा रखे हैं।
सुनील विश्नोई, एईएन रुडिप, माउंट आबू
- माउंट आबू में सीवरेज का कार्य पूर्ण रूप से फेल हो चुका है। 80 फ़ीसदी होटल व घरों को इस लाइन से नहीं जोड़ा गया है। सारा गंदा पानी नालों के मार्फत आगे जाकर नदियों में जा रहा है। पेयजल व पर्यावरण को पूरी तरह से दूषित किया जा रहा है। इसको लेकर कड़े कदम उठाने चाहिए।
सौरभ गांगडिया, पूर्व सदस्य मॉनिटरिंग कमेटी, माउंट आबू