कानून के अनुरूप जन चेतना से बदलाव संभव

सिलदर में 11 गांव के मेघवाल समाज के सम्मेलन को मुख्य अतिथि के तौर पर सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा, आरएसएस की कथनी भिन्न है

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Jun 07, 2016

सिरोही पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने कहा कि समाज में व्याप्त गैर बराबरी के खिलाफ लड़ाई लम्बी है, विधान के मुताबिक समानता पर आधारित समाज की संरचना के लिए अभी भी मिलजुलकर काम करना बाकी है। उन्होंने कहा कि सिर्फ कानून बनाने से बदलाव नहीं आता है। कानून के प्रावधान के मुताबिक लोगों में चेतना पैदा करनी पड़ती है। प्रत्येक व्यक्ति को अधिकारों के प्रति सजग होना है। लोढ़ा सोमवार को सिलदर में 11 गांव के मेघवाल समाज के सम्मेलन को मुख्य अतिथि के तौर पर सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भाजपा, आरएसएस की कथनी भिन्न है। आरएसएस के मोहन भागवत जोधपुर में आरक्षण के खिलाफ बात करते हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार भी यह नहीं कहते कि भागवत के विचारों से सहमत नहीं हैं।
अम्बेडकर के विचारों के खिलाफ काम
लोढ़ा ने कहा कि बाबा साहेब अम्बेडकर जाति प्रथा के खिलाफ थे। भाजपा आरएसएस ने हमेशा अम्बेडकर के विचारों के खिलाफ काम किया। इन्हंी लोगों के कारण अम्बेडकर को बौद्ध धर्म ग्रहण करना पड़ा। कानून मंत्री के रूप में अम्बेडकर के काम में उन्होंने हमेशा रुकावट पैदा कीं। इसी तरह सुभाषचन्द्र बोस के आजाद हिन्द फौज का भी उन्होंने विरोध किया था। पण्डित नेहरू जैसे महानायक का यह लोग चरित्रहरण करने में लगे हुए हैं। भाजपा व आरएसएस दिल्ली में सरकार बनाने के बाद जनता की भलाई पर ध्यान देने की बजाय सारा समय कांग्रेस के खिलाफ षड़्यंत्र में लगा रहे हैं। भाजपा आरएसएस ने पानी, बिजली, बस यात्रा, सर्विस टैक्स, वैट, एक्साइज ड्यूटी, स्वच्छता टैक्स लगा कर जनता पर बोझ डाला है। इससे आम आदमी के लिए दाल खाना भी मुश्किल हो गया है। थानाराम मेघवाल, गलाराम मेघवाल, गोवाराम मेघवाल, तलकाराम, रमेश मेघवाल, दरगाराम भील, रामलाल पुरोहित, प्रतापराम पुरोहित, पुखराज परिहार, प्रतापराम माली आदि ने भी विचार प्रकट किए।

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Published on:
07 Jun 2016 08:29 am
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