
रेपो रेट को यथावत रखा गया है। (PC: AI)
RBI Repo Rate: कर्ज सस्ता होने का इंतजार कर रहे लोगों को फिलहाल और इंतजार करना होगा। रिजर्व बैंक ने एक बार फिर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। बुधवार 8 अप्रैल को हुई मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी यानी MPC की बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कर दिया कि दुनिया में बढ़ते तनाव और महंगाई के नए खतरों को देखते हुए अभी ब्याज दरों में छेड़छाड़ करने का सही समय नहीं है।
हालांकि, RBI ने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद अभी भी मजबूत बनी हुई है। यानी तस्वीर पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि फिलहाल कदम फूंक-फूंककर रखना ही बेहतर माना गया है।
RBI ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बरकरार रखा है। इसका मतलब यह है कि बैंक जिस दर पर RBI से कर्ज लेते हैं, उसमें अभी कोई बदलाव नहीं होगा। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी पॉलिसी स्टांस को भी "न्यूट्रल" रखा है। सीधी भाषा में समझें तो RBI अभी न तो तेजी से दरें घटाने के मूड में है और न ही बढ़ाने के। वह हालात को देखकर आगे फैसला लेना चाहता है। इस फैसले के साथ कुछ दूसरी अहम दरें भी जस की तस रखी गई हैं। SDF रेट 5 फीसदी पर बनी हुई है। MSF रेट और बैंक रेट 5.50 फीसदी पर कायम है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि MPC ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है कि फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और मौद्रिक नीति का रुख न्यूट्रल ही रखा जाएगा।
सबसे बड़ी वजह है महंगाई का नया खतरा। खासतौर पर दुनिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव ने RBI की चिंता बढ़ा दी है। तेल और ऊर्जा की कीमतों में अचानक तेजी ने केंद्रीय बैंक को सतर्क कर दिया है। RBI का मानना है कि खाने-पीने की चीजों की स्थिति फिलहाल कुछ हद तक संभली हुई है। अच्छी रबी फसल, पर्याप्त जल भंडार और सरकारी भंडार में अनाज की उपलब्धता राहत देने वाली बात है। लेकिन मौसम भी अब भरोसे की चीज नहीं रह गया है। अगर अल नीनो जैसी स्थिति बनती है, तो खाद्य महंगाई फिर से सिर उठा सकती है। यानी अभी मामला "सब ठीक है" वाला नहीं, बल्कि "अभी संभलकर चलना है" वाला है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान 4.6 फीसदी रखा है। यह 2 से 6 फीसदी की तय सीमा के भीतर है, लेकिन सालभर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। तिमाही आधार पर देखें तो तस्वीर कुछ इस तरह है: पहली तिमाही में महंगाई 4 फीसदी रह सकती है। दूसरी तिमाही में यह 4.4 फीसदी तक जा सकती है। तीसरी तिमाही में 5.2 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। चौथी तिमाही में यह 4.7 फीसदी रह सकती है। कोर इन्फ्लेशन का अनुमान 4.4 फीसदी लगाया गया है। मतलब साफ है। RBI को डर यह नहीं कि महंगाई अभी हाथ से निकल गई है, बल्कि यह है कि आगे जाकर यह फिर सिरदर्द बन सकती है।
महंगाई की चिंता के बीच RBI ने यह भी साफ किया कि भारत की विकास दर पूरी तरह पटरी से उतरती नहीं दिख रही। केंद्रीय बैंक ने FY26 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.6 फीसदी पर ही बरकरार रखा है। हालांकि, FY27 के लिए RBI थोड़ी नरमी देख रहा है और उसने विकास दर का अनुमान 6.9 फीसदी रखा है। तिमाही आधार पर अनुमान इस तरह है: Q1 FY27: 6.8 फीसदी। Q2 FY27: 6.7 फीसदी। Q3 FY27: 7 फीसदी। और Q4 FY27: 7.2 फीसदी।
RBI का कहना है कि अगर अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है, वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल बनी रहती है या मौसम से जुड़ी परेशानियां बढ़ती हैं, तो इसका असर भारत की विकास दर पर भी पड़ सकता है।
सिर्फ ब्याज दरों पर फैसला ही नहीं हुआ, RBI ने कारोबार को आसान बनाने के लिए भी कुछ अहम घोषणाएं की हैं। खासतौर पर MSME सेक्टर के लिए ये कदम राहत देने वाले माने जा रहे हैं।
RBI ने कहा है कि बैंक बोर्ड के सामने किन-किन मामलों को ले जाना जरूरी है, इसकी समीक्षा की जाएगी। इससे बोर्ड का समय ज्यादा जरूरी रणनीतिक फैसलों पर लग सकेगा।
केंद्रीय बैंक ने बताया कि उसने 9000 से ज्यादा रेगुलेटरी निर्देशों को समेटकर 238 मास्टर डायरेक्शंस में बदल दिया है। इसी तरह सुपरविजन से जुड़े निर्देशों को भी व्यवस्थित किया गया है।
इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए नियम समझना और लागू करना आसान होगा।
RBI ने MSME के लिए TReDS प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग के दौरान ड्यू डिलिजेंस की अनिवार्यता हटाने का प्रस्ताव दिया है। सीधी भाषा में कहें तो छोटे कारोबारियों को बिल डिस्काउंटिंग और फंडिंग तक पहुंच अब थोड़ी आसान हो सकती है।
RBI ने मनी मार्केट को और गहरा बनाने के लिए कुछ अतिरिक्त गैर-बैंक संस्थाओं को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। अभी तक इस बाजार में मुख्य रूप से बैंक और स्टैंडअलोन प्राइमरी डीलर्स ही हिस्सा ले सकते थे।
Published on:
08 Apr 2026 01:11 pm
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