
ईरान ने अमेरिका के सामने प्रस्ताव रखा है। (PC: AI)
US Iran War: ट्रंप की धमकी, ईरान का फॉर्मूला और मंगलवार की वो डेडलाइन। एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान को तबाह कर देंगे। दूसरी तरफ ईरान ने कह दिया कि रुको, हमारे पास एक प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव 10 बिंदुओं वाला है और इसे पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। दुनिया अभी सांस रोककर देख रही है कि मंगलवार की डेडलाइन से पहले यह मामला किस करवट बैठता है।
ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही। इसलिए पाकिस्तान बिचौलिये की भूमिका निभा रहा है। तेहरान ने अपना 10 सूत्रीय प्रस्ताव पाकिस्तान के हाथों वाशिंगटन भेजा।
ईरान का प्रस्ताव सुनने में समझौते जैसा लगता है लेकिन इसमें कई कड़ी शर्तें हैं। सबसे पहली और सबसे बड़ी मांग यह है कि ईरान को गारंटी चाहिए कि उस पर दोबारा हमला नहीं होगा। यह कोई छोटी बात नहीं है। यह असल में अमेरिका और इजरायल दोनों से सुरक्षा की मांग है। दूसरी अहम मांग है कि इजरायल लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले बंद करे। यानी ईरान सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे इलाके की बात कर रहा है। तीसरी मांग है तमाम आर्थिक पाबंदियां हटाई जाएं। सालों से लगी पाबंदियों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह निचोड़ा है। ईरान ने कहा कि इन सबके बदले वह होर्मुज स्ट्रेट को खोल देगा।
यहां एक दिलचस्प बात है। ईरान ने कहा है कि होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज से करीब 20 लाख डॉलर की फीस ली जाएगी। यह रकम ईरान और ओमान में बंटेगी। इस रकम में ईरान का हिस्सा जंग में तबाह हुए बुनियादी ढांचे को दोबारा बनाने में लगाया जाएगा। यानी युद्ध का मुआवजा मांगने की बजाय ईरान ने एक चालाक रास्ता निकाला। जहाजों से फीस लो और उससे खुद को बनाओ।
ट्रंप ने इस प्रस्ताव को "महत्वपूर्ण कदम" तो बताया लेकिन साथ में यह भी जोड़ दिया कि यह काफी नहीं है। व्हाइट हाउस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि मंगलवार आखिरी डेडलाइन है और अगर ईरान ने होर्मुज नहीं खोला तो जो होगा उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। ट्रंप ने धमकी दी कि हमले इतने बड़े होंगे कि ईरान को दोबारा खड़े होने में 100 साल लग जाएंगे। एक तरफ बातचीत चल रही है और दूसरी तरफ धमकियां भी जारी हैं।
ईरानी मीडिया का कहना है कि देश अपनी स्थिति को कमजोर नहीं मान रहा। उनके पास होर्मुज बंद करने का हथियार है। अमेरिका का एक लड़ाकू विमान वो मार गिरा चुके हैं। इसलिए वो बराबरी की बात कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका ने उन पायलटों को ईरान की जमीन से बचा भी लिया। दोनों तरफ के अपने-अपने दावे हैं।
यह बातचीत अभी शुरू नहीं हुई। 24 मार्च को अमेरिका ने भी एक 15 सूत्रीय प्रस्ताव ईरान को भेजा था। ईरान ने उसे ठुकरा दिया। उसे "बेहद महत्वाकांक्षी और अतार्किक" बताया। अब ईरान ने अपना प्रस्ताव भेजा है जिसमें कुछ अमेरिकी बिंदुओं को भी शामिल किया गया है। यानी बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन रास्ता अभी लंबा है।
डेडलाइन नजदीक है। ईरान का प्रस्ताव मेज पर है। अमेरिका ने उसे नाकाफी बताया है। अगर मंगलवार तक कोई सफलता नहीं मिली तो जो होगा उसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक नहीं रहेगा। तेल महंगा होगा। बाजार हिलेंगे और वो देश सबसे ज्यादा परेशान होंगे जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए होर्मुज पर निर्भर हैं। भारत उनमें से एक है।
Updated on:
07 Apr 2026 04:51 pm
Published on:
07 Apr 2026 04:42 pm
बड़ी खबरें
View Allकारोबार
ट्रेंडिंग
